बिलासपुर… 7 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्कूल शिक्षा खेल प्रतियोगिता का उद्घाटन हुआ। प्रतियोगिता के उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव रहे। स्थानीय विधायक सुशांत शुक्ला समेत भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत रंगोली से हुई। इसी बीच करीब 1600 स्कूली बच्चों की उपस्थिति को लेकर राजनीतिक सवाल खड़े हो गए हैं। आयोजन खेल से जुड़ा होने के बावजूद विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से विभिन्न स्कूलों के प्राचार्यों को पत्र जारी किए जाने को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पत्र में ‘सेवा से संकल्प’ अभियान का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में चलाए जा रहे सेवा, संकल्प और जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रमों की कड़ी के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं। अलग-अलग स्कूलों से करीब 1600 बच्चों की उपस्थिति इसी निर्देश के तहत सुनिश्चित की गई है।

हालांकि मामले में खेल एवं क्रीड़ा अधिकारी वर्षा शर्मा का अलग पक्ष सामने आया है। वर्षा शर्मा ने बताया कि खेल प्रतियोगिता के उद्घाटन कार्यक्रम के लिए किसी भी बच्चे को नहीं बुलाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी संबंधित पत्र की उन्हें जानकारी नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब खेल विभाग की अधिकारी के अनुसार किसी बच्चे को बुलाया ही नहीं गया, तो फिर शिक्षा विभाग के पत्र में विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश किस उद्देश्य से दिए गए हैं।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अभय नारायण राय ने आरोप लगाया कि बच्चों को कार्यक्रम में जुटाने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन पर प्रशासनिक स्तर से दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि बच्चों का समय पढ़ाई और खेल गतिविधियों में लगना चाहिए। ऐसे में किसी आयोजन में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए शिक्षा विभाग को प्राचार्यों को बाकायदा निर्देश देना व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

राय ने कहा कि खेल आयोजन का उद्देश्य बच्चों को खेल से जोड़ना और उनकी प्रतिभा को सामने लाना होना चाहिए। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि इन 1600 विद्यार्थियों की भूमिका क्या थी। क्या वे खेल प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचे थे या केवल कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बुलाए गए थे? उन्होंने सवाल किया कि क्या बच्चों को सिर्फ रंगोली, मंच के सामने बैठाने और तालियां बजाने के लिए जुटाया गया था?

अलग-अलग स्कूलों से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को बुलाए जाने के साथ उनके आने-जाने, सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर दूर-दराज के स्कूलों से बच्चों को लाने की स्थिति में परिवहन, सुरक्षा, स्वास्थ्य और अभिभावकों की सहमति को लेकर क्या व्यवस्था रही, यह स्पष्ट होना चाहिए। वहीं कार्यक्रम निर्धारित समय से देर से शुरू होने की स्थिति में बच्चों को कितने समय तक स्कूल से बाहर रहना पड़ा और उनकी पढ़ाई कितनी प्रभावित हुई, इसका जवाब भी शिक्षा विभाग को देना होगा।

राय ने कहा कि बच्चों को किसी भी सरकारी आयोजन में शामिल करने का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए और उन्हें राजनीति से दूर रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे थे तो उनकी खेल गतिविधि और प्रतिभा महत्वपूर्ण होनी चाहिए, न कि किसी मंच की भीड़ बढ़ाना। बच्चों को खेल से जोड़ना अच्छी पहल है, लेकिन उनकी उपस्थिति का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं होना चाहिए।

कांग्रेस ने शिक्षा विभाग से सवाल किया है कि 1600 बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए प्राचार्यों को निर्देश देने की जरूरत क्यों पड़ी और यदि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। राय ने इसे बच्चों के शैक्षणिक समय के साथ-साथ उनके राजनीतिकरण से जुड़ा गंभीर सवाल बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।