बिलासपुर…अरपा नदी के पार बसे अरपांचल में पहली बार शासकीय स्तर पर रावण दहन का आयोजन प्रस्तावित है। इस आयोजन के साथ ही क्षेत्र की वर्षों पुरानी अलग नगर निगम की मांग फिर चर्चा में आ गई है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी ने कहा है कि जब अरपांचल को शासकीय आयोजन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, तो उसकी प्रशासनिक जरूरतों और अलग नगर निगम की मांग पर भी सरकार को ठोस पहल करनी चाहिए।

केशरवानी ने कहा कि अरपांचल अब शहर के किनारे बसा कोई छोटा इलाका नहीं रह गया है। नगर निगम के 70 वार्डों में से 24 वार्ड अरपांचल क्षेत्र में होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी आबादी वाले इस क्षेत्र में सड़क, नाली, जलनिकासी, स्वच्छता, यातायात और जलभराव जैसी समस्याएं अब भी लोगों के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

बारिश के दौरान स्थिति और कठिन हो जाती है। कई इलाकों में जलभराव से घरों और रास्तों के प्रभावित होने की समस्या सामने आती है। कुछ स्थानों पर राहत और बचाव के लिए नावों का इस्तेमाल तक करना पड़ा है। केशरवानी का कहना है कि ऐसे हालात में जलभराव महज कुछ घंटों की परेशानी नहीं रहता, बल्कि परिवारों के लिए घर, सामान, बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की जरूरतों से जुड़ा संकट बन जाता है।

उन्होंने कहा कि सड़क को केवल निर्माण के नजरिए से देखने के बजाय उसे आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत से जोड़कर देखना होगा। स्कूल जाने वाले बच्चों, अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों, काम पर जाने वाले मजदूरों और रोज घर लौटने वाले लोगों के लिए सड़क सीधे सुरक्षा और सुविधा का सवाल है। बारिश में जब यही रास्ते जलभराव से प्रभावित होते हैं तो समस्या का दायरा भी बढ़ जाता है।

अरपांचल का महत्व केवल आबादी और वार्डों तक सीमित नहीं है। क्षेत्र में एसईसीएल का मुख्यालय, अपोलो अस्पताल, केंद्रीय विश्वविद्यालय, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय और पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय जैसी प्रमुख संस्थाएं हैं। बहतराई का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से जुड़ी गतिविधियां भी इस क्षेत्र के बढ़ते महत्व की ओर संकेत करती हैं।

केशरवानी के मुताबिक, इतने बड़े आर्थिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य केंद्रों वाले क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं का विस्तार भी उसी अनुपात में होना चाहिए। उनका तर्क है कि बड़े संस्थान और सुविधाएं विकसित होने के साथ उनके आसपास बेहतर सड़क, जलनिकासी, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था भी जरूरी है।

उन्होंने शासकीय रावण दहन को लेकर स्पष्ट किया कि उनका सवाल आयोजन के खिलाफ नहीं है। मुद्दा यह है कि आयोजन एक दिन का है, जबकि अरपांचल की बुनियादी समस्याएं पूरे साल बनी रहती हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, रावण दहन एक दिन होगा, लेकिन सड़क की समस्या 365 दिन रहती है। सवाल आयोजन का नहीं, व्यवस्था का है।

अलग नगर निगम की मांग को लेकर केशरवानी ने अब क्षेत्र में जनजागरण अभियान चलाने की बात कही है। उनका कहना है कि अरपांचल के विभिन्न मोहल्लों और वार्डों में लोगों से संवाद कर उनकी समस्याएं सामने लाई जाएंगी। इसके बाद जनता की सहमति और भावना के आधार पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की दिशा तय की जाएगी।

केशरवानी ने कहा कि यह किसी व्यक्ति या शासकीय आयोजन के विरोध का विषय नहीं है, बल्कि क्षेत्र की प्रशासनिक जरूरतों का सवाल है। उन्होंने सरकार और स्थानीय बेलतरा विधायक से पूछा कि जब अरपांचल में 24 नगर निगम वार्ड हैं और यहां बड़े आर्थिक, स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक संस्थान मौजूद हैं, तो अलग नगर निगम की मांग पर ठोस पहल कब होगी।

उनका कहना है कि अरपांचल के लोग किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप प्रशासनिक व्यवस्था चाहते हैं। उनके मुताबिक, अब अलग नगर निगम की मांग का जवाब केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि सरकार की स्पष्ट पहल से मिलना चाहिए।