रायपुर (मनीष जायसवाल) ।दीपावली से पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शासकीय कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते तथा महंगाई राहत में 2 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा की। 1 नवंबर से महंगाई भत्ते की दर 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगी। सरकार ने इसे प्रदेश के करीब 3.85 लाख कर्मचारियों और 1.50 लाख पेंशनरों के लिए त्योहार की सौगात बताया, लेकिन कर्मचारी संगठनों को इस घोषणा में खुशी से ज्यादा निराशा नजर आई।

 

अधिकारी कर्मचारी फैडरेशन के नेता मनीष मिश्रा ने सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 1 जनवरी 2026 से देय 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता दस महीने बाद दिया जा रहा है। वह भी बिना एरियर के..! महंगाई जनवरी से जेब काट रही है और सरकार नवंबर से राहत देने की बात कर रही है। दस महीने तक कर्मचारियों ने महंगाई का बोझ उठाया, अब उस अवधि का हिसाब देने की बारी आई तो सरकार ने हाथ खड़े कर दिए।

 

मिश्रा बताते हैं कि महंगाई भत्ता कोई खैरात नहीं है, जिसे सरकार अपनी सुविधा और मर्जी से जब चाहे दे दे। यह कर्मचारियों का अधिकार है। केंद्र सरकार 1 जुलाई 2026 से 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाकर 63 प्रतिशत कर चुकी है, जबकि छत्तीसगढ़ में कर्मचारी 1 नवंबर से 60 प्रतिशत पर पहुंचेंगे। एक ही देश में महंगाई का सामना करने वाले केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में इतना अंतर क्यों..? कर्मचारी केंद्र के समान महंगाई भत्ता और देय तिथि से एरियर सहित भुगतान मांग रहे हैं, लेकिन सरकार हर बार तारीख आगे बढ़ाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती है..!

 

मनीष मिश्रा कहते हैं कि राज्य सरकार की नीति अब एक तय ढर्रे पर चल रही है। जनवरी से देय महंगाई भत्ते की किश्त जुलाई के बाद और जुलाई से देय किश्त जनवरी के बाद दी जाती है। यानी कर्मचारी को महंगाई पहले झेलनी है और राहत के लिए महीनों इंतजार करना है..। जब तक बढ़ा हुआ भत्ता मिलता है, तब तक अगली किश्त का इंतजार शुरू हो जाता है। एरियर का पैसा कर्मचारियों के हाथ में आने के बजाय सरकारी हिसाब-किताब में ही खेलता रहता है।

 

छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के संयोजक मनीष मिश्रा ने वित्त मंत्री ओपी चौधरी को भी चुनाव से पहले का उनका बयान याद दिलाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव 2023 के पहले ओपी चौधरी ने अपने वीडियो संदेश में महंगाई भत्ते को कर्मचारियों का मौलिक अधिकार बताया था…। पूर्ववर्ती सरकार के समय कर्मचारियों के अधिकारों के हनन पर आवाज उठाई जाती थी। आज जब उसी अधिकार पर चोट हो रही है तो वित्त मंत्री की आवाज कहां दब गई…? क्या विपक्ष में रहते हुए जो बात मौलिक अधिकार की थी, सत्ता में आने के बाद वह सरकार की मर्जी पर निर्भर हो गई…?

 

मिश्रा ने कहा कि वित्त मंत्री होने के नाते श्री चौधरी को मालूम है कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों की जेब में अतिरिक्त कमाई डालने के लिए नहीं, महंगाई से वेतन की घटती ताकत को बचाने के लिए दिया जाता है। देय तारीख से भुगतान नहीं होने और एरियर रोकने से हर कर्मचारी को हजारों से लाखों रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ता है। फिर भी सरकार इसे राहत की घोषणा बताकर अपनी पीठ थपथपा रही है।

 

उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मांग की कि 2 प्रतिशत महंगाई भत्ते की वृद्धि 1 जनवरी 2026 से एरियर सहित दी जाए और केंद्र के समान 3 प्रतिशत की वृद्धि 1 जुलाई 2026 से लागू की जाए। इसके साथ ही महंगाई भत्ते का पिछला बकाया एरियर भी दिया जाए। मनीष मिश्रा ने कहा कि कर्मचारियों को त्योहार के नाम पर ऐसी सौगात नहीं चाहिए, जिसमें उनका अपना बकाया ही गायब हो। सरकार को कर्मचारियों का हक देना है, एहसान नहीं करना है।

 

फेडरेशन के कर्मचारी नेता मनीष मिश्रा बताते हैं कि सरकार का यही रवैया रहा तो कर्मचारियों को अपनी दूसरी मांगों के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ेगा। मोदी की गारंटी में शामिल सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने का वादा कब पूरा होगा..? क्या शिक्षकों को फिर से आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ेगा..? इसके अलावा राज्य के दूसरे कर्मचारी संगठनों की लंबित मांगों पर कब फैसला होगा..? महंगाई भत्ते के लिए दस महीने इंतजार कराने वाली सरकार बाकी मांगों पर कितने महीने और कितने साल लगाएगी…? मोदी की गारंटी पर कर्मचारियों को घोषणाएं नहीं, उन पर अमल होता हुआ देखना है।