बलरामपुर (पृथ्वीलाल केशरी)। गरीबों को बांटे जाने वाले सरकारी राशन के चावल पर घरों से निकलने वाले गटर के गंदे पानी का छिड़काव किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। बलरामपुर जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत डुमरखोरका की राशन दुकान में चावल पर दूषित पानी डाले जाने की शिकायत के बाद ग्रामीणों ने विरोध जताया। मामला सामने आते ही जनपद सदस्य समीर सिंह देव और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान चावल पर गंदा पानी डाले जाने की पुष्टि हुई, जिसके बाद संबंधित बोरियों को सील कर दिया गया। गरीब परिवारों को बांटे जाने वाले अनाज के साथ इस तरह का व्यवहार राशन वितरण व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जनपद सदस्य समीर सिंह देव ने बताया कि ग्रामीणों ने उन्हें सूचना दी थी कि घरों से निकलने वाला गटर का गंदा पानी जिस तालाब में जमा होता है, वहां से पानी निकालकर राशन दुकान में रखे चावल पर छिड़का जा रहा है। सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और वीडियो देखा। उनके मुताबिक, लुल्लूराम राम और लल्लाराम ने पानी डालने की बात स्वीकार की। इसके बाद उन्होंने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दीपराज कांत पांडे को फोन कर जानकारी दी और खाद्य निरीक्षक को भी मौके पर बुलाया गया।

चावल में, गटर के पानी का इस्तेमाल ?

जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दीपराज कांत पांडे ने बताया कि जनपद सदस्य और ग्राम पंचायत के सरपंच सोहराय राम ने मामले से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत किए। मौके पर जांच के दौरान चावल पर तालाब का गंदा पानी डाले जाने की पुष्टि हुई। अधिकारियों ने संबंधित चावल की बोरियों को सील कर दिया है। उन्होंने बताया कि नल के पानी के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है और संबंधित लोगों ने पानी डालने की बात स्वीकार की है।

बताया गया कि चावल सूखने के कारण उस पर पानी छिड़का जा रहा था। लेकिन सवाल यह है कि चावल को नम रखने के लिए घरों से निकलने वाले गटर के गंदे पानी से भरे तालाब का पानी इस्तेमाल करने की नौबत कैसे आई? क्या राशन के भंडारण की व्यवस्था इतनी लचर है कि चावल को सुरक्षित रखने के लिए दूषित पानी का सहारा लिया जा रहा था? और यदि चावल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी, तो उसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को देने के बजाय ऐसा तरीका क्यों अपनाया गया?

गरीबों के निवाले तक पहुंच सकता था दूषित पानी

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला चावल लाखों जरूरतमंद परिवारों के भोजन का अहम हिस्सा है। ऐसे में घरों से निकलने वाले गटर के गंदे पानी से जुड़े तालाब के पानी का चावल पर छिड़काव केवल भंडारण की गड़बड़ी नहीं, बल्कि खाद्यान्न की गुणवत्ता और लोगों की सेहत से जुड़ा गंभीर मामला है। दूषित पानी के संपर्क में आए चावल का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकता है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित चावल का वितरण हुआ था या नहीं और यदि हुआ, तो वह किन परिवारों तक पहुंचा।

चावल का वजन बढ़ाने या किसी आर्थिक लाभ के उद्देश्य से पानी डालने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इस पहलू की जांच भी जरूरी है कि पानी किस उद्देश्य से डाला गया और इसमें किन लोगों की क्या भूमिका थी। साथ ही राशन दुकान में खाद्यान्न के भंडारण और उसकी गुणवत्ता की निगरानी करने वाले जिम्मेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

सरपंच ने भी मांगी कठोर कार्रवाई

ग्राम पंचायत के सरपंच सोहराय राम ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत पर वे तत्काल मौके पर पहुंचे और जनपद सदस्य तथा खाद्य निरीक्षक को इसकी सूचना दी। उन्होंने संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल चावल की संबंधित बोरियां सील कर जांच शुरू कर दी गई है। अब प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि गटर के गंदे पानी से जुड़े तालाब का पानी सरकारी चावल पर किस परिस्थिति में छिड़का गया, खाद्यान्न की गुणवत्ता कितनी प्रभावित हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। गरीबों के हिस्से के राशन में ऐसी गड़बड़ी सामने आने के बाद कार्रवाई केवल बोरियां सील करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए; जांच के निष्कर्षों के आधार पर जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।