रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में प्राचार्यों के रिक्त पदों को भरने और योग्य व्याख्याताओं को नेतृत्व का अवसर देने के लिए विभागीय प्राचार्य पदोन्नति फोरम ने नई पहल की है।

फोरम के पदाधिकारियों ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को ज्ञापन सौंपकर प्राचार्य के कुल रिक्त पदों में से 10 प्रतिशत पद विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से भरने की मांग की है।

फोरम का कहना है कि प्राचार्य पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया में वरिष्ठता के साथ योग्यता को भी अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए व्याख्याता संवर्ग के बीच पारदर्शी विभागीय परीक्षा आयोजित की जाए।

संगठन ने शासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार कर नीतिगत निर्णय लेने की मांग की है।

विभागीय प्राचार्य पदोन्नति फोरम के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में प्राचार्य पद पर पदोन्नति मुख्य रूप से वरिष्ठता के आधार पर होती है। ऐसे में कई योग्य व्याख्याताओं को वरिष्ठता सूची में पीछे होने के कारण अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षमता के अनुरूप अवसर नहीं मिल पाता।

फोरम ने मांग की है कि व्याख्याता संवर्ग के लिए विभागीय प्रतियोगी परीक्षा आयोजित की जाए और प्राचार्य के कुल रिक्त पदों में से 10 प्रतिशत पद इस प्रक्रिया से भरे जाएं। परीक्षा में शैक्षणिक योग्यता, प्रशासनिक क्षमता और शिक्षण अनुभव को उचित वेटेज देने का सुझाव भी दिया गया है।

फोरम के पदाधिकारियों का मानना है कि विभागीय परीक्षा की व्यवस्था लागू होने से योग्य व्याख्याताओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। संगठन के अनुसार, कई व्याख्याताओं के पास NET, SET, Ph.D. जैसी शैक्षणिक योग्यताएं और उत्कृष्ट शैक्षणिक रिकॉर्ड हैं। परीक्षा के माध्यम से उनकी योग्यता का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।

दूसरा फायदा प्राचार्यों के रिक्त पदों को भरने में तेजी के रूप में बताया गया है। फोरम का दावा है कि प्रदेश के 40 प्रतिशत से अधिक स्कूल प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। संगठन के मुताबिक, नियमित प्राचार्यों की कमी का असर विद्यालयों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ता है।

तीसरा लाभ स्कूलों में नेतृत्व और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार का बताया गया है। फोरम का कहना है कि योग्यता और क्षमता के आधार पर चयनित व्याख्याताओं को प्राचार्य बनने का अवसर मिलने से विद्यालयों के संचालन और शैक्षणिक परिणामों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

ज्ञापन में फोरम ने अन्य विभागों और केंद्रीय विद्यालयों में प्रचलित चयन व्यवस्थाओं का भी हवाला दिया है।

संगठन का मानना है कि विभागीय परीक्षा के माध्यम से प्राचार्य पद पर चयन की व्यवस्था छत्तीसगढ़ में भी लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए।

फोरम ने स्पष्ट किया कि उसकी मांग किसी मौजूदा व्यवस्था या किसी वर्ग के विरोध में नहीं है। संगठन का कहना है कि इसका उद्देश्य योग्य व्याख्याताओं को अवसर देना, प्राचार्यों की कमी दूर करने में मदद करना और सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करना है।