न्याय के दरवाज़े पर दरार?.. एक साथ 5 सिविल जजों का इस्तीफा… बड़ा सवाल
सभी जजों ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया

बिलासपुर: न्यायिक सेवा के भीतर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने व्यवस्था की मजबूती पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। कठिन प्रतियोगी परीक्षा और लंबी चयन प्रक्रिया पार कर न्यायिक सेवा में पहुंचे पांच सिविल जज जूनियर डिवीजन ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने हाईकोर्ट की अनुशंसा के बाद इन त्यागपत्रों को स्वीकार करते हुए अप्रैल माह में सभी को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है।
मामले की पड़ताल के बाद हाईकोर्ट ने त्यागपत्र स्वीकार करने की अनुशंसा की, जिसके आधार पर विभाग ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी की। आधिकारिक तौर पर सभी जजों ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है, लेकिन एक साथ पांच अधिकारियों का पद छोड़ना सामान्य प्रशासनिक घटना नहीं माना जा रहा।
दुर्ग में पदस्थ दिव्य सिंह सेंगर, महासमुंद में प्रिय दर्शन गोस्वामी और रायपुर में पदस्थ नंदनी पटेल, भामिनी राठी और अर्पित गुप्ता—इन सभी नामों का एक साथ सेवा से बाहर होना अब चर्चा के केंद्र में है। न्यायिक सेवा में प्रवेश की कठिन राह और जिम्मेदारियों के बीच अचानक लिया गया यह फैसला कई स्तरों पर सवाल खड़े कर रहा है।
इस घटनाक्रम ने न्यायिक व्यवस्था के भीतर कार्य परिस्थितियों, दबाव और सिस्टम की आंतरिक स्थिति को लेकर बहस छेड़ दी है। व्यक्तिगत कारण की आधिकारिक वजह के पीछे क्या केवल निजी परिस्थितियां हैं या फिर कोई गहरी संस्थागत चुनौती—यह सवाल अब आम जनमानस से लेकर कानूनी हलकों तक गूंज रहा है।





