chhattisgarh highcourt- ने हिंदी के एक सहायक प्राध्यापक का ऐसे शासकीय college में तबादला करने के मामले में आदेश रद्द कर दिया है, जहां उस subject का पद ही उपलब्ध नहीं था। सुनवाई के दौरान राज्य शासन के अधिवक्ता ने भी स्वीकार किया कि संबंधित कॉलेज में Hindi के सहायक प्राध्यापक का कोई पद रिक्त नहीं है।

इसके बाद जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने डॉ. बीरू लाल बरगाह की याचिका स्वीकार करते हुए 26 अक्टूबर 2026 को जारी तबादला आदेश निरस्त कर दिया।

डॉ. बीरू लाल बरगाह वर्तमान में बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के राजीव गांधी शासकीय महाविद्यालय, सिमगा में हिंदी के सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं।

cg higher education ने 26 अक्टूबर 2026 को उनका तबादला सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के भटगांव स्थित शासकीय राजमहंत नयन दास महालांग महाविद्यालय में कर दिया था। इस आदेश को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि सिमगा कॉलेज में हिंदी के सहायक प्राध्यापक का पद रिक्त था, जबकि भटगांव कॉलेज में पहले से डॉ. शुभा तिवारी Hindi के सहायक प्राध्यापक के रूप में पदस्थ हैं और वहां कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं है। ऐसे में तबादला राज्य की स्थानांतरण नीति के प्रावधानों को ध्यान में रखे बिना किया गया।

याचिका में शैक्षणिक सत्र और पारिवारिक परिस्थितियों का भी हवाला दिया गया। अधिवक्ता ने बताया कि शैक्षणिक सत्र के बीच तबादला होने से कक्षा 11वीं में पढ़ रहे डॉ. बरगाह के बेटे की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि डॉ. बरगाह मधुमेह से पीड़ित हैं और उन्हें नियमित चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन के अधिवक्ता ने अधिकारियों से प्राप्त निर्देशों के आधार पर स्वीकार किया कि भटगांव के संबंधित कॉलेज में हिंदी के सहायक प्राध्यापक का कोई पद उपलब्ध नहीं है। उन्होंने मामले को सक्षम अधिकारियों के समक्ष विचार के लिए भेजने का अनुरोध किया।

chhattisgarh highcourt ने मामले में कहा कि जिस संस्थान में संबंधित पद ही उपलब्ध नहीं है, वहां उस पद पर तबादला आदेश जारी नहीं किया जा सकता। इस आधार पर कोर्ट ने डॉ. बीरू लाल बरगाह की याचिका स्वीकार करते हुए 26 अक्टूबर 2026 के तबादला आदेश को निरस्त कर दिया।