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CG News,छत्तीसगढ़ में TET अनिवार्यता मामला : शिक्षकों ने सरकार से मांगी राहत, हजारों के भविष्य का सवाल

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा 23 अगस्त 2010 को जारी राजपत्र में स्पष्ट किया गया था कि TET केवल नई नियुक्तियों के लिए अनिवार्य है, जबकि पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए यह बाध्यता लागू नहीं होती।

cg news/रायपुर में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने राज्य के हजारों शिक्षकों के हित में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के नाम ज्ञापन सौंपकर इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का विषय नहीं, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अधिकार और भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा, रविंद्र राठौर और केदार जैन के निर्देश पर सौंपे गए इस ज्ञापन में वर्ष 2010 से पहले और बाद में नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट देने की मांग की गई है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा 23 अगस्त 2010 को जारी राजपत्र में स्पष्ट किया गया था कि TET केवल नई नियुक्तियों के लिए अनिवार्य है, जबकि पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए यह बाध्यता लागू नहीं होती।

इसके बावजूद विभिन्न राज्यों में इस नियम को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। फेडरेशन ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में इस मुद्दे से संबंधित लगभग 45 पुनर्विचार याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, केरल, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने अपील की है। 1 सितंबर 2025 के आदेश के बावजूद अब तक केंद्र सरकार या NCTE की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।

ज्ञापन में राज्य सरकार से मांग की गई है कि छत्तीसगढ़ में पूर्व नियुक्त और पदोन्नत शिक्षकों को TET से छूट देने का प्रावधान लागू किया जाए। इसके लिए 17 अगस्त 2012 को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी राजपत्र का हवाला भी दिया गया है। साथ ही, अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार से भी सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने का आग्रह किया गया है।

फेडरेशन ने यह भी मांग रखी है कि जब तक सभी लंबित मामलों पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता और केंद्र से स्पष्ट निर्देश नहीं आते, तब तक वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता लागू न की जाए। पदाधिकारियों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ न्याय होना चाहिए और उनके अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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