CG NEWS:स्कूली बच्चों के खाने में मिलावट की गई तो FIR होगी, आवासीय स्कूलों में भोजन सुरक्षा पर कड़े निर्देश जारी

CG NEWS:नया रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के आवासीय विद्यालयों, छात्रावासों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन पकाने और परोसने में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर) द्वारा सुकमा जिले के पकेला स्थित एक आवासीय स्कूल में भोजन में कथित तौर पर फिनाइल मिलाए जाने की गंभीर घटना का स्वतः संज्ञान लेने के बाद आए हैं, जिससे छात्रों की जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया था।
जैसा कि मालूम है कि 21 अगस्त 2025 की रात को, सुखमा जिले के पकेला स्थित आवासीय पोटाकेबिन स्कूल में 426 छात्रों के लिए पकाए गए भोजन (48 किलोग्राम सेम की सब्जी) में कथित तौर पर फिनाइल मिला दिया गया था। यह घटना तब सामने आई जब एक शिक्षक ने भोजन चखा, जो सरकार द्वारा निर्धारित एक शर्त है, और फिनाइल की तीव्र गंध महसूस की। गंध महसूस होने पर तुरंत छात्रों को यह जहरीला भोजन खाने से रोक दिया गया। फिनाइल एक रासायनिक पदार्थ है जो जहरीला होता है और इसकी एक बूंद भी, खासकर छोटे बच्चों के लिए, घातक हो सकती है। छात्रों के बयान के अनुसार, फिनाइल जानबूझकर मिलाया गया था, और एक छात्र ने कथित तौर पर एक व्यक्ति (एक शिक्षक) को अपना चेहरा स्कार्फ से ढंक कर सब्जी में कुछ मिलाते हुए देखा था। उच्च न्यायालय ने इस कृत्य को न केवल लापरवाही बल्कि एक आपराधिक कृत्य भी माना, जिसने छात्रों के जीवन को खतरे में डाल दिया था। यदि यह दूषित भोजन छात्रों द्वारा खा लिया गया होता, तो यह सभी छात्रों की जान ले सकता था और परिवारों का विश्वास भंग कर देता।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक हिंदी दैनिक में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए WP(PIL) No. 75/2023 के तहत एक जनहित याचिका (Suo Moto Public Interest Litigation) दायर की थी। न्यायालय ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया और उल्लेख किया कि इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, जहां बच्चों को अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार किया गया या दूषित भोजन परोसा जाता है। न्यायालय ने मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया कि वे सभी संबंधित हितधारकों (स्कूलों, छात्रावासों, आंगनबाड़ी केंद्रों) को भोजन की तैयारी और परोसने में स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित निर्देश जारी करें। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है।
मुख्य सचिव द्वारा जारी विस्तृत निर्देशों में कई प्रमुख बिंदु शामिल हैं, जिनका उद्देश्य भोजन सुरक्षा को बढ़ाना है । जिसके तहत भोजन परोसने से पहले शिक्षकों/वार्डन द्वारा प्रतिदिन भोजन का चखना और प्रमाणन आवश्यक है। एक “चखना रजिस्टर” का रखरखाव अनिवार्य है, जिस पर शिक्षक और रसोइया के हस्ताक्षर होंगे। नामित अधिकारियों द्वारा रसोई और भंडार कक्षों का नियमित अंतराल पर निरीक्षण किया जाएगा। रसायनों (जैसे फिनाइल, कीटनाशक, डिटर्जेंट, केरोसिन) को भोजन और खाना पकाने के क्षेत्रों से अलग सुरक्षित रूप से संग्रहित किया जाना चाहिए।अनाज, दालों, तेलों और सब्जियों के लिए ताले और सीलबंद कंटेनर का उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक जिले में स्कूलों/छात्रावासों/आंगनबाड़ी केंद्रों में खाद्य सुरक्षा की निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। चूक के लिए प्रधानाध्यापक/प्रभारी/वार्डन की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।खाना पकाने के दौरान और बाद में रसोई परिसर में अनाधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाएगा।आवासीय विद्यालयों/बड़े छात्रावासों के रसोई और भोजन क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।आकस्मिक/आश्चर्यचकित निरीक्षण किए जाएंगे। रसोइयों, सहायकों और कर्मचारियों को खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और रसायनों के संचालन का नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा।शिक्षकों और कर्मचारियों को संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत रिपोर्ट करने के लिए संवेदनशील बनाया जाएगा।
सभी छात्रावासों/स्कूलों में प्राथमिक चिकित्सा किट और बुनियादी एंटीडोट उपलब्ध होने चाहिए।आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से टाई-अप किया जाएगा।खाद्य विषाक्तता की स्थिति में आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।खाद्य सुरक्षा के लिए अभिभावक-शिक्षक निगरानी समिति का गठन किया जाएगा।अभिभावकों/समुदाय प्रतिनिधियों के साथ नियमित अंतराल पर समीक्षा बैठकें (मासिक/त्रैमासिक/छमाही) आयोजित की जाएंगी।
निर्देश यह भी है कि भोजन में जानबूझकर मिलावट की किसी भी घटना की तुरंत पुलिस को सूचना दी जाएगी और संबंधित आईपीसी/बीएनएस प्रावधानों के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी। खाद्य गुणवत्ता/सुरक्षा से संबंधित खामियों की सूचना देने के लिए राज्य-स्तरीय हेल्पलाइन या शिकायत तंत्र स्थापित किया जाएगा।प्रत्येक घटना, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर को अनिवार्य रूप से रिपोर्ट करनी होगी। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा मध्याह्न भोजन/छात्रावास खाद्य योजनाओं का त्रैमासिक/अर्धवार्षिक/वार्षिक स्वतंत्र लेखा परीक्षा किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का पूर्ण सजगता और उत्तरदायित्व के साथ पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की शिथिलता पाए जाने पर कठोर कार्यवाही की जाएगी। उच्च न्यायालय ने भी कहा है कि किसी भी चूक को बहुत गंभीरता से देखा जाएगा।





