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CG NEWS:गुमटी से गीता तक: रतनपुर के रचनाकार बुद्धिसागर सोनी “प्यासा” की साहित्यिक तपस्या को कविता चौपाटी में मिला सम्मान

CG NEWS:बिलासपुर।अरपा नदी के किनारे बसी साहित्य की बस्ती “कविता चौपाटी से” में रविवार को 54वां सत्र आयोजित हुआ। यह आयोजन न केवल काव्य की रसधार से सराबोर रहा, बल्कि इसमें एक ऐसे गुमनाम किंतु गंभीर रचनाकार को मंच मिला, जो जीवन की जद्दोजहद से उठकर साहित्य की ऊंचाई पर पहुंचने की संघर्षगाथा को जी रहा है।

हम बात कर रहे हैं रतनपुर के साहित्य साधक बुद्धिसागर सोनी “प्यासा” की – एक ऐसा नाम, जो चाय-नाश्ते की गुमटी चलाते हुए भी कलम की तपस्या में रत है। सादगी, संघर्ष और साहित्य का अद्भुत समन्वय उनके व्यक्तित्व को एक अनूठा आयाम देता है।

बुद्धिसागर सोनी रतनपुर के उसी पवित्र धरा से आते हैं, जहां कभी छत्तीसगढ़ की राजधानी हुआ करती थी। आज वे उसी ऐतिहासिक नगर में एक साधारण गुमटी चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन उनका मन साहित्य की लौ से जगमगाता है। दिनभर की हाड़तोड़ मेहनत के बाद जब शहर सो जाता है, तब उनकी लेखनी जागती है। यही लेखनी उन्हें साधारण से असाधारण बनाती है।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में कवियत्री अनामिका शर्मा ने जब बुद्धिसागर सोनी के जीवन और साहित्यिक योगदान को सामने रखा, तो उपस्थित श्रोताओं की आंखें भर आईं। उन्होंने बताया कि सोनी का खंडकाव्य “कर्मण्येवाधिकारस्ते” न केवल गीता के दर्शन को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है, बल्कि यह वर्तमान समय में आमजन के जीवन-संघर्ष और आध्यात्मिक द्वंद्व का समाधान भी प्रस्तुत करता है।

इस खंडकाव्य में गीता के सांख्य योग और निष्काम योग को एक ऐसे लोकभाषाई सरलीकरण में पिरोया गया है, जो समाज के हर वर्ग को आत्मबोध की दिशा में प्रेरित करता है। विषम परिस्थितियों में लिखा गया यह ग्रंथ बुद्धिसागर की आत्मिक शक्ति और लेखन की गहराई का प्रमाण है।

रचना के अंश का अनावरण मुख्य अतिथि राघवेन्द्र धर दीवान के करकमलों द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बुधराम यादव ने की, जबकि डॉ. मंतराम यादव ने बुद्धिसागर सोनी को शाल, श्रीफल और प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया।

“कविता चौपाटी से” टीम की पहल निःसंदेह सराहनीय है। यह मंच उन रचनाकारों की खोज करता है जो समाज की भीड़ में खो जाते हैं, लेकिन उनमें रचनात्मकता का अथाह समंदर होता है। टीम के सदस्यों – शैलेश गुप्ता, पूर्णिमा तिवारी, राजेश खरे, सतीश पांडेय, धनेश्वरी ‘गुल’ और द्वारिका वैष्णव सहित अन्य कई प्रतिभाओं ने इस सत्र को सार्थक और समर्पित बनाया।

कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाने वालों में एस. विश्वनाथ राव, सरला सोनी, वैभव सराफ, अनामिका सराफ, विजय चौहान, सचिन साहू, लेखनी जाधव, रश्मि रामेश्वर गुप्ता सहित अनेक नाम शामिल रहे। संचालन महेश श्रीवास कर रहे थे।

बुद्धिसागर सोनी जैसे रचनाकार इस बात के प्रतीक हैं कि साहित्यिक प्रतिभा न सुविधा की मोहताज होती है, न ही किसी विशेष मंच की। गुमटी के सहारे जीवन चलाने वाले इस साधक की लेखनी समाज को वो दृष्टि दे रही है, जिसकी आज बेहद ज़रूरत है। वे सही मायनों में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा से जुड़े “साहित्य के संत” हैं।

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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