CG Heatwave/कोण्डागांव/ जिला मुख्यालय सहित पूरा क्षेत्र इन दिनों भीषण गर्मी की तीखी तपिश से झुलस रहा है। इस साल सूरज के कड़े तेवरों ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।

जिले में पारे की चाल इतनी तेज है कि करीब एक सप्ताह पहले ही तापमान 43 डिग्री सेल्सियस की ‘लक्ष्मण रेखा’ पार कर चुका है। मौसम के मिजाज को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में गर्मी का यह सितम और भी ज्यादा बढ़ सकता है।

स्थानीय जानकारों और ज्योतिषियों के अनुसार, इस वर्ष हिंदू पंचांग में ज्येष्ठ का ‘अधिक मास’ होने के कारण गर्मी का प्रभाव सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक और लंबे समय तक महसूस किया जा रहा है। सुबह 10 बजे के बाद से ही सूरज की किरणें आग बरसाने लगती हैं, जिससे दोपहर होते-होते बाजारों और मुख्य सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। भीषण उमस और लू के थपेड़ों ने लोगों का घर से निकलना मुहाल कर दिया है।

मौसम के इस बदले मिजाज का सीधा असर अब आम जनता की सेहत पर दिखाई देने लगा है। कोण्डागांव जिला अस्पताल में लू (Heatstroke) और गर्मी जनित बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।

अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन ऐसे दर्जनों मरीज पहुंच रहे हैं जिन्हें तेज धूप के कारण शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रेम मंडावी ने नागरिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है।

डॉ. मंडावी ने बताया कि भीषण गर्मी में शरीर का तापमान नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने सलाह दी है कि लोग नियमित रूप से पर्याप्त पानी पिएं और जूस, फल व अन्य तरल पदार्थों (Liquid Diet) को अपने भोजन में शामिल करें ताकि शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन न हो। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि खाली पेट कभी भी तेज धूप में बाहर न निकलें। हमेशा घर से भरपेट भोजन और पानी पीकर ही निकलें ताकि लू का खतरा कम हो सके।

डॉक्टरों के अनुसार, धूप में निकलते समय शरीर को सूती और ढीले कपड़ों से पूरी तरह ढंकना चाहिए। साथ ही छाते या टोपी का उपयोग करना अनिवार्य है। लू लगने के प्रारंभिक लक्षणों जैसे चक्कर आना, अचानक बहुत कमजोरी महसूस होना, उल्टी होना या तेज बुखार आने पर इसे नजरअंदाज न करें। ये लक्षण गंभीर और जानलेवा भी हो सकते हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टरी सलाह लेना आवश्यक है।

बढ़ती गर्मी और लू की स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल प्रशासन ने भी कमर कस ली है। अस्पताल में गर्मी से प्रभावित मरीजों के त्वरित उपचार के लिए आवश्यक दवाइयां, ओआरएस (ORS) के पैकेट और अन्य चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।