बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नर्सिंग होम को सील करने की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों में नगर निगम को नर्सिंग होम सील करने का वैधानिक अधिकार नहीं दिया गया है। कोर्ट ने संबंधित मामले में दुर्ग नगर निगम आयुक्त की ओर से 15 दिसंबर 2022 को जारी नोटिस और उसके आधार पर की गई सीलिंग की कार्रवाई को रद्द कर दिया।

हालांकि, हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले से नर्सिंग होम को जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों या अन्य वैधानिक लाइसेंस संबंधी शर्तों का पालन करने से छूट नहीं मिलती। किसी भी उल्लंघन पर सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।

मामले में याचिकाकर्ता ने नगर निगम आयुक्त के उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसके बाद उसके नर्सिंग होम को कथित अनियमितताओं, नर्सिंग होम अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन में कमी और जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के उल्लंघन के आरोपों के आधार पर सील कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि नगर निगम आयुक्त के पास नर्सिंग होम को सील करने का वैधानिक अधिकार नहीं है। इसलिए नोटिस जारी करना और उसके आधार पर परिसर को सील करना अधिकार क्षेत्र से बाहर की कार्रवाई है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि संबंधित अधिकारियों ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड पर उचित विचार किए बिना कार्रवाई की, जिससे याचिकाकर्ता के व्यवसाय करने के मौलिक अधिकार पर असर पड़ा।

अधिनियम की धारा 9 का किया उल्लेख

हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य उपचारगृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2010 की धारा 9 का उल्लेख किया। कोर्ट के अनुसार, नर्सिंग होम के लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने की प्रक्रिया अधिनियम में निर्धारित प्रावधानों के तहत संचालित होती है।

इस प्रक्रिया में सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तावित कार्रवाई के आधार और कारण बताते हुए 30 दिन का नोटिस देना तथा जवाब पर विचार करने के बाद कारणयुक्त आदेश पारित करना होता है। कोर्ट ने संबंधित कानूनी व्यवस्था के संदर्भ में स्पष्ट किया कि नर्सिंग होम के लाइसेंस के नियमन और उसे रद्द करने की शक्ति नगर निगम को प्राप्त नहीं है।

नगर निगम आयुक्त के पास सीलिंग का अधिकार नहीं

हाई कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिनियम और नियमों के तहत दुर्ग नगर निगम को नर्सिंग होम का लाइसेंस जारी करने, उसका नियमन करने, लाइसेंस रद्द करने या नर्सिंग होम को सील करने की वैधानिक शक्ति नहीं दी गई है।

कोर्ट ने यह भी गौर किया कि नगर निगम ने अदालत के समक्ष स्वीकार किया था कि नर्सिंग होम अधिनियम के तहत जिला कलेक्टर सक्षम प्राधिकारी हैं। ऐसे में वैधानिक अधिकार के अभाव में नगर निगम आयुक्त की ओर से नोटिस जारी कर नर्सिंग होम को सील करने की कार्रवाई कानूनी रूप से उचित नहीं थी।

नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई रद्द, नियमों के पालन की जिम्मेदारी बरकरार

इन तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने 15 दिसंबर 2022 को जारी नोटिस और उसके परिणामस्वरूप नर्सिंग होम को सील करने की कार्रवाई रद्द कर दी।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नर्सिंग होम संचालक जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन नियमों तथा अन्य लागू वैधानिक लाइसेंस संबंधी आवश्यकताओं का पालन करने के लिए बाध्य रहेगा। यदि किसी उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार उचित कार्रवाई कर सकता है