malhar school News:बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी ब्लॉक स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मल्हार के प्राचार्य पर हुई कार्रवाई को लेकर प्राचार्य मंच ने सवाल उठाए हैं। मंच के संयोजक संजय शर्मा ने कार्रवाई को एकपक्षीय बताते हुए स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के प्रस्ताव, वित्तीय अभिलेखों और CCTV फुटेज सहित अन्य दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

संजय शर्मा का कहना है कि स्कूल में छात्रों और शिक्षकों के बीच संवादहीनता के कारण अप्रिय स्थिति बनी है। इसे दूर करने के लिए जरूरी है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई नियमित हो, प्रत्येक विषय के लिए शिक्षक उपलब्ध रहें और शिक्षक निर्धारित कालखंड में अध्यापन के साथ विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान भी करें।

प्राचार्य मंच के संयोजक ने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले स्कूल से जुड़े सभी पक्षों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने SMC की प्रस्ताव पंजी, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खाते, रसीदों और CCTV फुटेज को जांच में शामिल करने की मांग की है।

संजय शर्मा के अनुसार, मल्हार स्कूल के प्राचार्य दिव्यांग हैं और उनका सेवाकाल भी एक वर्ष से कम बचा है। ऐसे में उनका पक्ष सुने बिना या केवल एक पक्ष की बात के आधार पर निर्णय लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि प्राचार्य और शिक्षकों की बात सुनकर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

संजय शर्मा ने कहा कि स्कूलों में नियमित प्राचार्य की नियुक्ति और बेहतर व्यवस्था बनाने के प्रयासों के दौरान शिक्षकों, प्राचार्य और विद्यार्थियों के बीच समन्वय बनाए रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, मल्हार स्कूल में भी संवाद और तालमेल की कमी के कारण स्थिति बिगड़ने की बात सामने आई है।

उन्होंने जोर दिया कि शिक्षकों को विद्यार्थियों का लगातार मार्गदर्शन करना चाहिए। इससे न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि पाठ्य सहगामी गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी भी बढ़ेगी। स्कूल में ऐसा वातावरण होना चाहिए, जहां विद्यार्थी नियमित रूप से आएं और शिक्षक-प्राचार्य के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखें।

प्राचार्य मंच के संयोजक ने स्कूल के मामलों में बाहरी तत्वों के हस्तक्षेप पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि स्कूल के भीतर की समस्याओं का समाधान शिक्षा विभाग, प्राचार्य, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद से किया जाना चाहिए। विवाद बढ़ने से शैक्षणिक माहौल और पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका रहती है।

उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन और शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने की जिम्मेदारी प्राचार्य और शिक्षकों की है, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों के बीच सहयोग और समन्वय जरूरी है।

प्राचार्य और शिक्षकों का पक्ष सुनने की अपील

संजय शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों की शिकायतों को सुनना जरूरी है और प्रशासन द्वारा उन पर कार्रवाई करना भी प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन प्राचार्य और शिक्षकों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार, दोनों पक्षों को सुने बिना निष्कर्ष निकालना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के अनुरूप नहीं होगा।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्राचार्य, शिक्षक और विद्यार्थियों को एक साथ बैठाकर समस्याओं का समाधान निकाला जाए। इसके लिए दीर्घकालिक योजना तैयार की जाए, ताकि स्कूल में बेहतर तालमेल स्थापित हो और नियमित अध्यापन प्रभावित न हो।

प्राचार्य मंच ने मांग की है कि मल्हार स्कूल से जुड़े मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और सभी संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाए। मंच का कहना है कि विवाद का स्थायी समाधान निकालना ही विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूल के शैक्षणिक वातावरण के हित में होगा।