बिलासपुर । बिलासपुर ही नहीं देश की साहित्यिक विरासत के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर, ख्यातिलब्ध कवि, कथाकार, समीक्षक एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य श्रीकांत वर्मा की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। छत्तीसगढ़ भवन स्थित उनकी प्रतिमा पर उपस्थित साहित्यकारों, कलाकारों एवं शहर के गणमान्य नागरिकों ने हार एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया।
श्रीकांत वर्मा का जन्म 18 सितंबर 1931 को बिलासपुर में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक जीवन में अनेक संघर्षों के बीच अपनी साहित्यिक यात्रा आरंभ की और आगे चलकर आधुनिक हिंदी कविता के महत्वपूर्ण कवियों में अपना विशिष्ट स्थान बनाया। नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. करने के बाद वे पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हुए। बिलासपुर से निकलने वाली पत्रिका ‘नई दिशा’ के संपादन से लेकर दिल्ली की साहित्यिक-पत्रकारीय दुनिया तक उनकी यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रही।

उनकी रचनात्मक प्रतिभा ने उन्हें ‘भटका मेघ’, ‘मायादर्पण’, ‘दिनारंभ’, ‘जलसाघर’ और ‘मगध’ जैसे महत्वपूर्ण काव्य-संग्रह दिए। विशेष रूप से ‘मगध’ ने श्रीकांत वर्मा की काव्य-दृष्टि को व्यापक पहचान दिलाई और इसके लिए उन्हें मरणोपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। वे कविता के साथ-साथ कहानी, आलोचना, यात्रा-वृत्तांत और अनुवाद के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे।

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साहित्य के साथ उनका सार्वजनिक जीवन भी उल्लेखनीय रहा। पत्रकारिता से होते हुए वे राष्ट्रीय सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय हुए तथा 1976 में राज्यसभा के सदस्य बने और 1986 तक सदन के सदस्य रहे। इस तरह श्रीकांत वर्मा उन विरल रचनाकारों में रहे जिन्होंने साहित्य, पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन—तीनों क्षेत्रों में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई।

उनकी कविता ‘मगध’ में इतिहास के माध्यम से अपने समय की सत्ता, समाज और मनुष्य की जटिलताओं को देखने की विशिष्ट दृष्टि दिखाई देती है। आज भी उनकी रचनाएँ समकालीन हिंदी साहित्य में गंभीर विमर्श का विषय हैं।

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इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि बिलासपुर के लिए श्रीकांत वर्मा केवल एक महान साहित्यकार का नाम नहीं, बल्कि शहर की साहित्यिक पहचान और गौरव का महत्वपूर्ण अध्याय हैं। उनकी स्मृति और साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुँचाना शहर की सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।इस अवसर पर रामकुमार तिवारी, सतीश जायसवाल, राजू यादव, अजय श्रीवास्तव, राजेश सोनथालिया, अरुण दावड़कर,रूपल जी, चेतना वर्मा, विनोज लिंगम, श्री कुमार,बजेंद्र श्रीवास्तव, एस. विदुला, सुरेंद्र वर्मा, गजेंद्र श्रीवास्तव, अनु पाण्डेय, सोनिया एवं कांति पटेल सहित अन्य साहित्यप्रेमी एवं नागरिकउपस्थित रहे।

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