बिलासपुर… छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने अपने दूसरे कार्यकाल की अंतिम जनसुनवाई में महिलाओं से जुड़े कई संवेदनशील मामलों पर सुनवाई करते हुए बेबाक टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि 13 जुलाई को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है और इस दौरान उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महिला आयोग का उद्देश्य कभी परिवार तोड़ना नहीं रहा, बल्कि हर संभव स्थिति में परिवारों को बचाने और समझौते का रास्ता निकालने का प्रयास किया गया।

बिलासपुर स्थित जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभा भवन में आयोजित प्रदेश की 411वीं जनसुनवाई में बिलासपुर, मुंगेली और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही सहित विभिन्न जिलों से आए मामलों की सुनवाई हुई। किरणमयी नायक ने बताया कि केवल बिलासपुर जिले में ही उनके कार्यकाल के दौरान यह 23वीं जनसुनवाई रही।

जनसुनवाई के दौरान सबसे अधिक समय सरकंडा क्षेत्र से जुड़े एक एनडीपीएस प्रकरण की सुनवाई में लगा। दो नाबालिग बहनों ने आयोग के समक्ष शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि उनके पिता ने षड्यंत्रपूर्वक उनकी मां को एनडीपीएस एक्ट के मामले में फंसा दिया, जिसके कारण वह पिछले चार महीने से जेल में हैं।

सुनवाई के बाद किरणमयी नायक ने कहा कि प्रथम दृष्टया कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि यदि 3000 प्रतिबंधित गोलियां बरामद हुई थीं, तो जांच एजेंसी को उनके बैच नंबर, सप्लाई चेन, संबंधित एजेंसी, डीलर और मेडिकल स्टोर तक पूरी कड़ी की जांच करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयां किसी गृहिणी तक कैसे पहुंचीं, यह स्वयं गंभीर जांच का विषय है।

महिला आयोग ने इस मामले में विस्तृत आदेश पारित कर उसकी प्रति अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रश्मि चावला को उपलब्ध कराई है। आयोग ने नाबालिग बच्चियों को भी आदेश की प्रति देकर कहा कि वे आवश्यकता पड़ने पर इसे न्यायालय में अपनी पैरवी और उपलब्ध कानूनी अधिकारों के तहत उपयोग कर सकती हैं।

किरणमयी नायक ने बताया कि जनसुनवाई में नारायणपुर की एक गेस्ट लेक्चरर की शिकायत, मल्हार थाना क्षेत्र से जुड़े एक अधिवक्ता की शिकायत तथा जातीय विवाद से जुड़े अन्य मामलों की भी सुनवाई की गई। कुछ मामलों में आयोग ने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए, जबकि कुछ मामलों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव या आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने के कारण निराकृत कर दिया गया।

पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि उनके अनुभव में ऐसे भी कई मामले आए, जिनमें प्रथम दृष्टया महिलाओं द्वारा कानून के दुरुपयोग की आशंका दिखाई दी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक मामले में निर्णय तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही लिया जाता है।

पुरुष आयोग की आवश्यकता संबंधी प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह सरकार और नीति निर्धारकों का विषय है, लेकिन बदलते सामाजिक परिवेश में भविष्य में इस पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कानून समय और समाज की आवश्यकताओं के अनुसार विकसित होते रहते हैं।

हाल के चर्चित मामलों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि समाज में संवाद की कमी और पारिवारिक दबाव कई बार गंभीर घटनाओं का कारण बनते हैं। उन्होंने युवाओं से अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में स्पष्ट संवाद रखने की अपील भी की।

अपने कार्यकाल को याद करते हुए किरणमयी नायक ने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिली, उसे उन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया। उन्होंने बताया कि छह वर्षों के दौरान उन्होंने प्रदेश के लगभग सभी जिलों का दौरा कर सैकड़ों जनसुनवाई के माध्यम से हजारों महिलाओं की शिकायतों का निराकरण कराने का प्रयास किया।

एनडीपीएस मामले में महिला आयोग के प्रमुख निर्देश

  • जांच की निष्पक्षता पर प्रथम दृष्टया सवाल।
  • दवाइयों के बैच नंबर और सप्लाई चेन की जांच पर जोर।
  • एएसपी रश्मि चावला को आदेश की प्रति सौंपी।

नाबालिग बच्चियों को न्यायालय में उपयोग के लिए आदेश की प्रति उपलब्ध कराई।

किरणमयी नायक की पांच प्रमुख बातें

  • “हर शिकायत में महिला सही हो, यह जरूरी नहीं।”
  • “महिला आयोग का काम घर तोड़ना नहीं, घर बसाना है।”
  • “कुछ मामलों में कानून के दुरुपयोग की आशंका भी सामने आती है।”
  • “बदलते समय में पुरुष आयोग पर भी भविष्य में विचार हो सकता है।”
  • “छह वर्षों का कार्यकाल पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाया।”