सूरजपुर / अंबिकापुर ।छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में स्थित मदननगर गांव शुक्रवार सुबह उस वक्त हिंसा की चपेट में आ गया, जब प्रस्तावित कोयला खदान के लिए भूमि अधिग्रहण और सर्वे कार्रवाई को लेकर पुलिस-प्रशासन की टीम और ग्रामीण आमने-सामने आ गए। सुबह करीब पांच बजे पुलिस दल गांव के सरपंच को गिरफ्तार करने पहुंचा था, लेकिन इसकी भनक लगते ही सैकड़ों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव किया और लाठी-डंडों से हमला बोल दिया, जिसमें डीएसपी सहित दो दर्जन से अधिक पुलिस अधिकारी और जवान घायल हो गए। कई ग्रामीणों के घायल होने की भी सूचना है।

कहां और क्यों शुरू हुआ विवाद

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यह पूरा मामला प्रतापपुर से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित मदननगर गांव और आसपास के करीब 18 किलोमीटर के दायरे से जुड़ा है, जहां एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की ओर से एक कोयला खदान प्रस्तावित है। इस भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ग्रामीण पिछले करीब तीन वर्षों से लगातार विरोध जता रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन बिना उनकी सहमति के भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई कर रहा है, जबकि उनकी मांगों और आपत्तियों पर अब तक ठीक से सुनवाई नहीं हुई है।

प्रशासन का पक्ष इससे अलग है। अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार को पुलिस टीम खदान से जुड़ी किसी कार्रवाई के लिए नहीं, बल्कि गांव के सरपंच सहित कुछ आरोपियों को गिरफ्तार करने पहुंची थी। इन आरोपियों पर पहले से गैंगस्टर एक्ट सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं, और सरपंच को पिछले कई महीनों से नोटिस भेजकर आत्मसमर्पण के लिए बुलाया जा रहा था। कलेक्टर के अनुसार, तीन महीने से लगातार नोटिस भेजे जाने के बावजूद आरोपी सामने नहीं आए, जिसके बाद पुलिस टीम को गिरफ्तारी के लिए भेजा गया।

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झड़प में क्या हुआ

जैसे ही पुलिस टीम गांव में दाखिल हुई, बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने रास्ते में बैरिकेड लगाकर विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीण तीर-धनुष और लाठी-डंडों के साथ डटे हुए थे। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और भीड़ ने पथराव करते हुए पुलिस बल पर हमला बोल दिया। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए पीछे हटना पड़ा और हल्के बल प्रयोग का सहारा लेना पड़ा। झड़प में डीएसपी सहित दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई गई। घायलों को प्रतापपुर और धरमपुर के स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक दर्जन से अधिक घायलों का उपचार चल रहा है। झड़प के दौरान सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया।

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घटना के बाद पुलिस ने 26 से अधिक ग्रामीणों और सरपंच के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, हालांकि अब तक इनमें से सिर्फ एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा सका है, बाकी की तलाश जारी है।

गांव बना छावनी, 750 से ज़्यादा जवान तैनात

घटना के बाद प्रशासन ने मदननगर और आसपास के इलाके को पूरी तरह पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया है। बताया जा रहा है कि सुरक्षा संभाग की सभी जिलों से अतिरिक्त बल बुलाकर करीब 750 जवानों को क्षेत्र में तैनात किया गया है, जिनमें से करीब 500 जवान सीधे मौके पर मुस्तैद हैं। एहतियात के तौर पर चकाजामा से होकर गुजरने वाला अंबिकापुर-प्रतापपुर मार्ग बाधित कर दिया गया है, जिससे आने-जाने वाले यात्रियों को खासी परेशानी हो रही है। सुरक्षा कारणों से कई अन्य मार्गों पर भी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन लगातार ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

पुराना असंतोष, अधूरा मुआवजा

यह पहला मौका नहीं है जब मदननगर में इस खदान परियोजना को लेकर टकराव हुआ हो। करीब डेढ़ साल पहले भी एसईसीएल की टीम के साथ इसी तरह की झड़प हो चुकी है, जिसमें प्रशासनिक टीम की पिटाई हुई थी। ग्रामीणों का कहना है कि महान-3 परियोजना के तहत अब तक उन्हें पूरा मुआवजा नहीं मिला है — करीब 30 प्रतिशत प्रभावित किसानों को ही अब तक मुआवजा दिया गया है, जबकि बाकी अब भी अपने हक का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा प्रस्तावित 18 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना में से अब तक सिर्फ 6 किलोमीटर सड़क ही बन पाई है, जिसे लेकर भी ग्रामीणों में नाराज़गी है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उनकी सहमति के बिना ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर आमादा है, जबकि उनकी बुनियादी मांगें अब भी अनसुनी हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

घटना के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए पूर्व मंत्री डॉ. शिव डहरिया के नेतृत्व में आठ सदस्यीय जांच समिति गठित की है। इस समिति में पूर्व मंत्री टी.एस. सिंहदेव सहित कई पूर्व विधायकों और जनप्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। समिति क्षेत्र का दौरा कर तथ्यों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपेगी।

प्रशासन की सफाई

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि पुलिस टीम भूमि अधिग्रहण करवाने नहीं, बल्कि पूर्व से दर्ज आपराधिक मामलों में वांछित आरोपियों को गिरफ्तार करने गई थी। अधिकारियों के मुताबिक पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराई जा रही है और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में तनाव बरकरार है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।