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Chhattisgarh

APAAR ID: शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, अपार आईडी में लापरवाही पर 61 हेड मास्टर्स और 7 प्राइवेट स्कूलों को नोटिस, कलेक्टर ने जताई नाराजगी

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में स्कूली छात्रों की डिजिटल पहचान यानी 'अपार आईडी' (APAAR ID) बनाने में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग ने सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के स्कूलों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर हड़कंप मचा दिया है।

मनेंद्रगढ़: छत्तीसगढ़ के MCB जिले में स्कूली बच्चों के भविष्य से जुड़ी ‘अपार आईडी’ (One Nation One Student ID) बनाने के काम में सुस्ती दिखाना अब स्कूल प्रबंधकों को भारी पड़ रहा है।

जिले में छात्रों की दर्ज संख्या के मुकाबले 50 फीसदी से भी कम आईडी बनने पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है।

इस लापरवाही के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने 61 सरकारी स्कूलों के हेड मास्टर्स और 7 नामचीन प्राइवेट स्कूलों के संस्था प्रमुखों को शोकॉज नोटिस जारी कर तलब किया है।

हाल ही में कलेक्टर ने जिला मुख्यालय में विभागवार कामकाज की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई थी। जब स्कूल शिक्षा विभाग की बारी आई, तो अपार आईडी की रिपोर्ट देखकर कलेक्टर दंग रह गए।

आंकड़ों से पता चला कि जिले के अधिकांश स्कूलों ने इस महत्वपूर्ण कार्य में रुचि नहीं दिखाई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल छात्र संख्या के आधे बच्चों की भी आईडी अब तक पोर्टल पर अपडेट नहीं हो पाई है। कलेक्टर ने इसे शासन के आदेशों की अवहेलना मानते हुए डीईओ और बीईओ (BEO) को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

कलेक्टर के कड़े रुख के बाद शिक्षा विभाग एक्शन मोड में आ गया है। डीईओ द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित स्कूलों के प्रमुखों को न केवल लिखित में स्पष्टीकरण देना होगा, बल्कि उन्हें डीईओ और जिला पंचायत सीईओ के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि जिन छात्रों की आईडी अब तक लंबित है, उनका काम युद्धस्तर पर पूरा किया जाए, अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई और सख्त हो सकती है।

मीडिया रिपोर्ट अनुसार अपार आईडी’ केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ योजना का हिस्सा है। इसके जरिए छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड, उपलब्धियां और क्रेडिट स्कोर एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहता है।

छात्रवृत्ति, प्रवेश और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए यह आईडी अनिवार्य की जा रही है। जिले में निजी स्कूलों की भी लापरवाही सामने आने के बाद अब उन पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।

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