रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की तेलीबांधा पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने ‘ब्लैक करेंसी स्वाइप स्कैम’ (काले कागज से नोट बनाने के नाम पर ठगी) करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह पर बड़ी कार्रवाई की है.

पुलिस ने मामले में मुंबई (पालघर) से दो और शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

इससे पहले पुलिस इस हाइटेक और हाई-प्रोफाइल ठगी गिरोह के 9 सदस्यों को महाराष्ट्र के पुणे स्थित एक रिसॉर्ट से रंगे हाथों दबोच चुकी है.

पुलिस अब तक आरोपियों के पास से 4 करोड़ रुपये से अधिक नकद, 20 मोबाइल फोन, केमिकल, कांच की प्लेट्स और भारी मात्रा में नोट के आकार के काले कागज जब्त कर चुकी है.

तेलीबांधा थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 330/2026 (बीएनएस की धारा 318(4), 61(2)) के तहत जारी जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मुंबई (पालघर) में दबिश देकर दो और आरोपियों को पकड़ा:

 रामायण सिंह उर्फ अभिषेक सिंह (39 वर्ष): निवासी रुस्तम जी ग्लोबल सिटी, विरार वेस्ट, पालघर (मुंबई).

 दीपक सिंह (46 वर्ष): निवासी रोज गार्डन बिल्डिंग, मीरा रोड, पालघर (मुंबई).

ऐसे हुआ पूरे रैकेट का पर्दाफाश (पुणे के 5-स्टार रिसॉर्ट से रेड):

मामले की शुरुआत तेलीबांधा थाने में दर्ज शिकायत से हुई, जहां पहले दो महिला आरोपियों कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय (कोलकाता) और दीपिका पॉलीवाल (राजस्थान) को पकड़ा गया था. उनके मोबाइल की जांच में मिले साइबर इनपुट्स के आधार पर रायपुर पुलिस की टीम ने पुणे (महाराष्ट्र) में एक सप्ताह तक डेरा डाला.

खंडाला स्थित एक लग्जरी रिसॉर्ट में छापेमारी कर पुलिस ने 7 आरोपियों को उस वक्त रंगे हाथों दबोचा, जब वे वाराणसी के एक बड़े व्यापारी को झांसे में लेकर उससे करीब 4 करोड़ रुपये ठग चुके थे.

पुलिस ने मौके से व्यापारी के 4 करोड़ रुपये कैश बरामद किए और सभी आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर ले आई.

पूछताछ में आरोपियों ने छत्तीसगढ़, नोएडा, पुणे, वडोदरा, उदयपुर, दिल्ली और मुंबई सहित देश के कई राज्यों में अरबों रुपये की ठगी की बात कबूली है. यह गिरोह बेहद शातिराना अंदाज में काम करता था:

 आरोपी खुद को दाऊद इब्राहिम के ‘डी-कंपनी’ और बड़े राजनीतिक-फिल्मी हस्तियों का करीबी बताते थे. गिरोह के मुख्य सरगना अपने साथ प्राइवेट आर्म्स गनमैन (हथियारबंद सुरक्षाकर्मी) रखते थे.

 पीड़ितों को फंसाने के लिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और नागपुर के महंगे 5-स्टार होटलों में बैठकें आयोजित की जाती थीं.

  गिरोह पीड़ितों के सामने काले कागज पर विशेष केमिकल छिड़ककर असली नोट में बदलने का फर्जी डेमो दिखाता था. इसके लिए वे पहले से छिपे असली नोटों का चालाकी से इस्तेमाल करते थे.

डेमो के बाद विदेशी केमिकल खरीदने, हाई-पावर केमिकल टेस्टिंग, फॉरेन क्लीयरेंस और फाइलों की प्रोसेसिंग के नाम पर करोड़ों रुपये ऐंठकर आरोपी फरार हो जाते थे.

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ ‘कैप्टन’ (या शेट्टी/रेड्डी) और मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ ‘बड़े सर’ इस गिरोह के मुख्य सूत्रधार हैं.

आरोपी प्रवीण कुमार (कैप्टन) और मनोज कुमार (बड़े सर) पहले भी मुंबई और वाराणसी जेल में इसी प्रकार की हाई-प्रोफाइल ठगी के मामलों में बंद रह चुके हैं. फिलहाल पुलिस गिरफ्तार सभी 11 आरोपियों के बैंक खातों और संपत्तियों को खंगालने में जुटी है.