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Bilaspur

अग्निकांड में कारोबारी को बड़ा झटका: कोर्ट बोली—“रिहायशी इलाके को बारूदघर बना दिया

55 लाख की तबाही, बच्ची घायल… अब कोर्ट ने दिखाई सख्ती

अंबिकापुर..(पृथ्वीलाल केशरी).. राम मंदिर रोड पर हुए भीषण अग्निकांड ने अब कानूनी मोर्चे पर भी बड़ा मोड़ ले लिया है। प्लास्टिक और पटाखा कारोबारी प्रवीण अग्रवाल को राहत देने से अदालत ने साफ इनकार कर दिया। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ममता पटेल की कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए साफ कहा कि घनी आबादी के बीच ज्वलनशील और विस्फोटक सामग्री का भंडारण बेहद गंभीर लापरवाही है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

23 अप्रैल को “प्रवीण एजेंसी” में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया था। दुकान और गोदाम में रखा प्लास्टिक सामान, पटाखे और अन्य ज्वलनशील सामग्री धधक उठी। आग इतनी भयावह थी कि पास के मकान तक लपटें पहुंच गईं। पड़ोसी प्रतुल पांडेय के घर का एसी, फ्रिज, टीवी समेत लगभग पूरा घरेलू सामान जल गया, जबकि दीवारों में गहरी दरारें पड़ गईं। हादसे में एक बच्ची भी घायल हुई।

वेल्डिंग की चिंगारी बनी तबाही की वजह

जांच में सामने आया कि दुकान की छत पर वेल्डिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान निकली चिंगारी नीचे रखे सामान पर गिरी और देखते ही देखते पूरा परिसर आग के गोले में बदल गया। पुलिस का दावा है कि मौके से बड़ी मात्रा में अधजले पटाखे बरामद हुए हैं, जिससे अवैध भंडारण की आशंका मजबूत हुई है।

नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं”

सुनवाई के दौरान अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि रिहायशी इलाके में विस्फोटक और ज्वलनशील सामग्री रखने वालों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है। यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है और उससे जनहानि या बड़े नुकसान की स्थिति बनती है, तो ऐसे मामलों में राहत देने का आधार कमजोर पड़ जाता है।

कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी को अग्रिम जमानत मिलने पर साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। केस डायरी में पुलिस ने यह भी दर्ज किया कि आरोपी विवेचना में सहयोग नहीं कर रहा और उसकी तलाश जारी है।

IG की सख्ती के बाद बढ़ीं गंभीर धाराएं

शुरुआती एफआईआर में हल्की धाराएं लगाई गई थीं, लेकिन मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस महानिरीक्षक के हस्तक्षेप के बाद जांच तेज हुई। एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने बीएनएस की गंभीर धाराएं और विस्फोटक अधिनियम की धाराएं जोड़ दीं। इनमें ऐसी धाराएं भी शामिल हैं जिनमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।

शॉर्ट सर्किट” की दलील भी नहीं आई काम

कारोबारी पक्ष ने अदालत में दावा किया कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी और व्यवसाय के वैध दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड और बरामद सामग्री मामले को गंभीर बनाती है। इसी आधार पर अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।

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