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Next Solar Lunar Eclipse,अगस्त में लगेगा साल का दूसरा सूर्य और चंद्र ग्रहण; जानें भारत में सूतक काल की स्थिति और सावधानी के जरूरी नियम

ज्योतिष के मुताबिक, जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है तो सूरज की रोशनी धरती तक पहुंच नहीं पाती है, तो सूर्य ग्रहण लगता है। चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है, इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है।

Next Solar Lunar Eclipse।दिल्ली: साल 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से काफी हलचल भरा रहने वाला है। इस वर्ष कुल चार ग्रहणों का योग है, जिनमें से दो (एक सूर्य और एक चंद्र ग्रहण) पूर्ण हो चुके हैं। अब अगस्त के महीने में साल का दूसरा सूर्य ग्रहण और दूसरा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। हालांकि, ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आने वाले ये दोनों ही ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, जिससे इनके सूतक काल को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।

कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण?Next Solar Lunar Eclipse

​साल का दूसरा और इस वर्ष का एकमात्र पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) बुधवार, 12 अगस्त 2026 को लगेगा।

  • दृश्यता: यह अद्भुत नजारा आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।
  • भारत में प्रभाव: यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात के समय लगेगा, इसलिए भारत में यह अदृश्य रहेगा। भारत में दिखाई न देने के कारण यहाँ इसका कोई ज्योतिषीय प्रभाव या सूतक काल मान्य नहीं होगा।

साल का आखिरी और दूसरा चंद्र ग्रहण

​सूर्य ग्रहण के ठीक बाद, शुक्रवार 28 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और अंतिम ग्रहण लगेगा, जो कि एक आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) होगा।

  • दृश्यता: यह मुख्य रूप से उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के पश्चिमी हिस्सों में देखा जा सकेगा।
  • भारत में प्रभाव: सूर्य ग्रहण की तरह यह चंद्र ग्रहण भी भारत में नजर नहीं आएगा, जिसके चलते भारत में सूतक काल के नियम लागू नहीं होंगे।

खगोलीय घटना: क्यों लगते हैं ग्रहण?Next Solar Lunar Eclipse

  • सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है और सूरज की रोशनी को धरती तक पहुंचने से रोकता है, तब सूर्य ग्रहण लगता है।
  • चंद्र ग्रहण: जब सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के बीच आ जाती है, तो चंद्रमा पृथ्वी की छाया से पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक जाता है।

ग्रहण काल में क्या करें और क्या नहीं? (सामान्य मान्यताएं)

​यद्यपि अगस्त के ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, फिर भी ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है:

  • सूतक काल: ग्रहण के सूतक काल में पूजा-पाठ वर्जित होता है। घर के मंदिर को पर्दे से ढक देना चाहिए।
  • खान-पान: ग्रहण के दौरान भोजन करने या बनाने से बचना चाहिए। पहले से बने खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए ताकि वे दूषित न हों।
  • गर्भवती महिलाएं: गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें घर से बाहर निकलने, सिलाई-कढ़ाई करने या नुकीली चीजों (चाकू, कैंची) का उपयोग करने से बचना चाहिए।
  • शुद्धिकरण: ग्रहण की समाप्ति के बाद पूरे घर और पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव कर शुद्धिकरण करना शुभ माना जाता है।

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