स्कूल शिक्षा: अफसरों की चुप्पी और मंत्रालय की सर्जरी कब..आरटीई के नाम पर खजाने में सेंध मारी कब होगी बंद…..?

बिलासपुर (मनीष जायसवाल) ।स्कूल शिक्षा मंत्री का स्कूलों में जाकर बच्चों से संवाद करना तस्वीरों में बहुत अच्छा लगता है, सुर्खियां भी खूब बनती हैं, लेकिन सच यह है कि इससे विभाग की असली बीमारियां शायद ही ठीक हों..। छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था आज जिस हाल में है, उसका इलाज स्कूलों के औचक निरीक्षण की दवाई देने से नहीं होगा। इसके लिए मंत्रालय और संचालनालय की उस कार्य-संस्कृति में सर्जरी चाहिए जो सालों से गलत फैसलों को बिना सवाल, बिना समीक्षा और बिना जवाबदेही के आगे बढ़ाती आई है..।
समस्या यह बिल्कुल नहीं कि विभाग में समझदार और काबिल अधिकारी नहीं है..। समस्या यह है कि वे बोलते नही, फाइलें खामोशी से चलती हैं, आदेश बिना तैयारी के निकलते हैं और पूरा तंत्र ऐसे चल रहा है मानो यस सर और जी सर कह देना ही नौकरी की सबसे बड़ी योग्यता हो..। यही प्रशासनिक डर और सुविधा ने शिक्षा व्यवस्था को अंदर से खोखला कर दिया है..।
विभाग अगर आईना देखे तो दिखाई देगा की बीएड धारी सहायक शिक्षक की भर्ती पद स्थापना पूर्व सरकार में अति उत्साह से हो गई थी..। कोर्ट के आदेश से जब इन्हें हटाया गया तो इनकी जगह डीएड किए हुए सहायक शिक्षको समायोजित कर उसी गलती को फिर दोहराया गया और इन्हें वही भेज दिया गया जहां पहले से शिक्षक थे। यह भी ध्यान नहीं रखा गया कि युक्तिकरण की प्रक्रिया उस वक्त सामने थी… ।
युक्तियुक्तकरण के नाम पर विभाग ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। दावा-आपत्ति का मौका नहीं, वरिष्ठता का सम्मान नहीं। फिर भी निचले स्तर के अधिकारियों ने साहस नहीं जुटाया। कि कहे बड़े साहब आप गलत राह में जा रहे है। इस चुप्पी का नतीजा यह हुआ कि शिक्षकों ने खुद कोर्ट पहुंच कर सरकार की पोल खोल दी, उसके बाद भी रायपुर में बैठे बड़े अफसरों ने फाइल पर बस आल इज वेल लिख रहे हैं..। फिर भी इस अव्यवस्था के जिम्मेदार लोगों पर कार्यवाही नहीं हुई। आज भी युक्ति युक्तिकरण के पीड़ित कई मोर्चे पर न्याय की लड़ाई लड़ रहे है। और यदि फैसला उनके पक्ष आ गया तब .?
भर्ती और पदोन्नति का खेल भी इसी अव्यवस्था का शिकार है।किसी ने नहीं टोका की पदोन्नति का क्रम नीचे से ऊपर होता है, ना कि ऊपर से नीचे…। पदोन्नति जिले से लेकर संचालनालय के अधिकारियों के विवेक के आधार पर हो रही लेकिन इस बात का ध्यान रखा जा रहा है उसी क्रम में भर्ती भी हो रही है या नहीं ..। या फिर नई शिक्षक भर्ती में सबसे प्राथमिकता कौन सा संवर्ग है..!
किसी ने टोका नही कि अभी बोर्ड परीक्षा के एकदम नजदीक है व्याख्याता की प्राचार्य के पद पर पदोन्नति करने से हाई स्कूल हायर सेकेंडरी स्कूल में विषय विशेषज्ञ के पद खत्म हो जाएंगे क्योंकि व्याख्याता की जगह भरी नहीं गई है। ऐसे में स्कूलों से बेहतर नतीजे की उम्मीद की करेंगें
आज आलम यह हो। गया है कि विभाग की शिक्षक भर्ती, पदोन्नति, वरिष्ठता सूची और वेतनमान से जुड़े विषय युद्ध क्षेत्र बन गए है ..। यह कोई विडंबना नहीं, प्रशासनिक विफलता का साफ-साफ सबूत है..।
रायपुर से जो आदेश निकलते हैं उनमें जमीन की खुशबू तक नहीं आती। कुत्तों की गिनती से लेकर अनंत ऑनलाइन पोर्टल तक शिक्षक अब बच्चों से कम और पोर्टल से ज्यादा बात करते है..। गुणवत्ता के नाम पर ढेर सारी योजनाएं आती हैं, पर उनकी समीक्षा और असर पर कोई बात नहीं करता…। बचा-खुचा काम एनजीओ ने स्कूलों को अपनी प्रयोग शाला बना लिया है।
ऊपर से निजी स्कूलों ने सरकारी शिक्षा को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया हैं.. नियमों को ताक पर रखकर गली-गली में चल रहे निजी स्कूल के लिए शिक्षा विभाग के पास कोई भी निगरानी का तंत्र नहीं है। मान्यता के नाम पर खाना पूर्ति से प्राइवेट स्कूल शिक्षा अधिकारियों की जेब भरने की दुकान बन गए है, वही ये स्कूल आरटीई के नाम पर सरकारी खजाने में सेंधमारी करके धड़ल्ले से अपनी दुकान चला रहे हैं। मुफ्त सरकारी शिक्षा और प्राइवेट स्कूलों के महंगे महंगे डेकोरेशन वाली शिक्षा से नौनिहालों का भविष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए दौर में भी विकास को तरस रहा है..।
सबसे खतरनाक बात यह है कि अनुभवी अधिकारी सब कुछ जानते-समझते हैं, फिर भी चुप रहते हैं। बोलेंगे तो कल उनकी ही खिंचाई होगी, उनकी गलतियां खोजी जाएंगी और निपटा दिया जाएगा..। यही चुप्पी बार-बार विभाग को कोर्ट की चौखट पर ले जा रही है।
मंत्री का बच्चों से संवाद सराहनीय कदम है,बड़े दिन बाद ऐसा कोई शिक्षा मंत्री बना है जो स्कूलों के चक्कर लगा रहा है लेकिन अभी जरूर प्रशासनिक पकड़ और सर्जरी की है ताकि कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाए तो गलत बात पर ना कहने का साहस ब्लॉक तक के अधिकारी में हो , तब तक सुधार सिर्फ भाषणों, पोस्टरों और दौरों की सुर्खियों तक ही सीमित रहेगा। स्कूलों की असलियत नहीं बदलेगी..। शिक्षा सुधारनी है तो पहले अफसरों की जीभ और रीढ़ दोनों ठीक करनी होंगी। बाकी सब बाद में..!





