अंगूठे से हस्ताक्षर तक: आज 40 हजार लोग बदलेंगे अपनी पहचान
जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा: मजदूरी के बीच भी 40 हजार लोग तैयार

बिलासपुर…सुबह की मजदूरी, दोपहर की जिम्मेदारियां और शाम तक की थकान… इन्हीं सबके बीच आज हजारों लोग अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। 22 मार्च को जिलेभर में होने वाली साक्षरता आकलन परीक्षा सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए नई पहचान की शुरुआत है, जिन्होंने कभी स्कूल का दरवाजा नहीं देखा, लेकिन अब कलम पकड़ना सीख लिया है।
घर की चौखट से परीक्षा केंद्र तक

इस परीक्षा में सबसे बड़ी भागीदारी महिलाओं की है। 40,065 शिक्षार्थियों में 29,348 महिलाएं शामिल हैं। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि उस बदलाव की तस्वीर है जहां घर की चौखट तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब परीक्षा केंद्र तक पहुंचकर अपनी साक्षरता का प्रमाण देने जा रही हैं।
काम भी, परीक्षा भी”: समय की बाधा नहीं

प्रशासन ने इस परीक्षा को लोगों की जिंदगी के हिसाब से ढाला है। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कभी भी परीक्षा देने की सुविधा दी गई है। यानी खेत, मजदूरी या रोजमर्रा के काम के बीच भी लोग समय निकालकर परीक्षा दे सकते हैं। यह व्यवस्था बताती है कि साक्षरता अब किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि जिंदगी के साथ चलने वाली प्रक्रिया बन चुकी है।
गांव-गांव माहौल: मुनादी, प्रभात फेरी

जिले में 961 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं और हर गांव में इस परीक्षा को लेकर अलग माहौल दिखाई दे रहा है। मुनादी हो रही है, प्रभात फेरियां निकाली जा रही हैं और दीवारों पर लिखे नारे लोगों को याद दिला रहे हैं कि यह मौका सिर्फ परीक्षा का नहीं, बल्कि बदलाव का है।
सिर्फ कागज नहीं, आत्मसम्मान की परीक्षा
यह परीक्षा उन लोगों के लिए है जिन्होंने पढ़ना-लिखना और बुनियादी गणित सीखा है। अब इस आकलन के बाद उन्हें साक्षर होने का प्रमाण पत्र मिलेगा। लेकिन असल मायने में यह प्रमाण पत्र सिर्फ कागज नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का प्रतीक होगा—एक ऐसा आत्मविश्वास, जो उन्हें समाज में नई पहचान देगा।
आज की परीक्षा, कल बदली हुई जिंदगी
आज जब हजारों लोग परीक्षा केंद्र की ओर बढ़ेंगे, तो यह सिर्फ एक दिन की घटना नहीं होगी। यह उस बदलाव की शुरुआत होगी, जहां ‘अंगूठा लगाने’ की मजबूरी खत्म होगी और ‘हस्ताक्षर करने’ का आत्मविश्वास जन्म लेगा।





