डिजिटल युग में युवाओं का सामाजिक उत्तरदायित्व ही राष्ट्र निर्माण की मूल धुरी: डॉ. संजीव शुक्ला
राष्ट्रीय युवा दिवस पर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में एनएसएस द्वारा भव्य विशेष व्याख्यानमाला का आयोजन

बिलासपुर।स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर मनाए जा रहे राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के शिक्षण विभाग की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा “समसामयिक डिजिटल युग में युवा: सामाजिक उत्तरदायित्व” विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यानमाला का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को डिजिटल युग की चुनौतियों एवं अवसरों से अवगत कराते हुए उन्हें सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक, सजग एवं संवेदनशील बनाना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक डॉ. संजीव शुक्ला (आईपीएस) ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी संबोधन में युवाओं को डिजिटल दुनिया की मायावी वास्तविकताओं से रूबरू कराया। उन्होंने डार्क नेट पर फैल रही अवैध गतिविधियों, साइबर अपराधों एवं ऑनलाइन खतरों के प्रति विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. शुक्ला ने कहा, “डिजिटल संसार सूचनाओं का अथाह सागर है, किंतु युवाओं को विवेकपूर्ण चयन की कला सीखनी होगी। हर चमकती वस्तु सोना नहीं होती।” उन्होंने मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, सतर्क ब्राउजिंग जैसी व्यावहारिक साइबर सुरक्षा तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए एक प्रेरक कथा के माध्यम से ‘संकल्प से सिद्धि’ का संदेश दिया तथा परिश्रम को जीवन का सर्वोच्च आदर्श मानने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति आचार्य ए.डी.एन. बाजपेयी ने डिजिटल सशक्तिकरण एवं सामाजिक सरोकारों के गहन अंतर्संबंध पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “तकनीक तब तक सार्थक है, जब तक वह समाज के कल्याण एवं उत्थान में योगदान देती है।” कुलपति ने सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग, पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल साक्षरता तथा आपात स्थितियों में मोबाइल के इमरजेंसी SOS फीचर एवं लाइव लोकेशन शेयरिंग जैसी जीवन-रक्षक तकनीकों की उपयोगिता बताते हुए युवाओं को स्मार्ट, जिम्मेदार एवं सुरक्षित नागरिक बनने का संदेश दिया।
उद्घाटन सत्र में कंप्यूटर विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. एच.एच. होता ने स्वागत भाषण देते हुए युवा ऊर्जा की तुलना वायु की अजेय गति से की तथा युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मूल धुरी बताया। उन्होंने ‘स्टार्टअप इंडिया’ एवं ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों का उल्लेख करते हुए युवाओं से नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी सृजन करने वाले (Job Provider) बनने का संकल्प लेने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में डॉ. प्रमोद तिवारी (छात्र कल्याण अधिष्ठाता एवं जनसंपर्क अधिकारी) सहित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के सैकड़ों छात्र-छात्राएँ, शोधार्थी एवं प्राध्यापकगण उत्साहपूर्वक उपस्थित रहे। डिजिटल नैतिकता, साइबर सुरक्षा एवं उद्यमिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक सुझाव साझा किए गए। समापन अवसर पर अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. तारनीश गौतम ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, आयोजन समिति, एनएसएस स्वयंसेवकों एवं प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को न केवल ज्ञानवर्धन की दिशा देते हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से उत्तरदायी नागरिक भी बनाते हैं। अपने संबोधन को उन्होंने इस सूक्त वाक्य के साथ सार्थक किया— “युवा वही, जो स्वयं जले और दूसरों को भी प्रकाश दे।”
यह आयोजन स्वामी विवेकानंद के युवा-दर्शन को साकार करने के साथ-साथ डिजिटल युग में युवा शक्ति को सही दिशा, स्पष्ट दृष्टि एवं दृढ़ संकल्प प्रदान करने में पूर्णतः सफल रहा। विश्वविद्यालय की ओर से राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत बलौदाबाजार में भी विद्यार्थियों ने कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मनोज सिन्हा और कार्यक्रम अधिकारी श्री आदित्य प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया।






