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Chhattisgarh

SDM ने दी थी 26 की अनुमति, प्रिंसिपल ने काट दिए 49 पेड़.. लाखों का हिसाब गायब, डीईओ ने थमाया नोटिस

सरगुजा जिले के बतौली से सरकारी पैसे की हेराफेरी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने हॉस्टल निर्माण की आड़ में प्रशासन की अनुमति से दोगुने पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलवा दी और लाखों रुपयों का हिसाब भी डकार गए।

सरगुजा: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बतौली के प्राचार्य (प्रिंसिपल) की बड़ी मनमानी और वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है।

हॉस्टल निर्माण के नाम पर एसडीएम के आदेशों का उल्लंघन करते हुए अतिरिक्त पेड़ों की कटाई कराने और उनकी बिक्री से मिली राशि का गबन करने के आरोप में सरगुजा डीईओ (DEO) ने प्रिंसिपल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

मामले के अनुसार, सीतापुर एसडीएम ने हॉस्टल निर्माण के लिए स्कूल परिसर के सामने केवल 26 पेड़ों को काटने की अनुमति दी थी। लेकिन प्राचार्य ने नियमों को ताक पर रखते हुए 49 पेड़ों की कटाई करा दी। यानी अनुमति से 23 पेड़ ज्यादा काट दिए गए। मामला तब तूल पकड़ा जब ग्रामीणों ने इसकी शिकायत विभाग से की।

बीईओ की जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

डीईओ के निर्देश पर बतौली बीईओ (BEO) ने मौके पर जाकर जांच की। कटे हुए पेड़ों के ठूंठ की गिनती, शिक्षकों और ग्रामीणों के बयान के बाद जो रिपोर्ट सामने आई, वह चौंकाने वाली है:

हिसाब में हेराफेरी: काटे गए पेड़ों को बेचने के बाद केवल 4 लाख 9 हजार रुपये का हिसाब दिया गया है, जबकि शेष बड़ी राशि का कोई अता-पता नहीं है। यह पैसा सरकारी खाते में जमा भी नहीं कराया गया।

लकड़ी की किस्म छिपाई: रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि कौन सी लकड़ी इमारती थी और कौन सी जलाऊ।

गंभीर उल्लंघन: बीईओ ने इसे वन अधिनियम, वन उपज अधिनियम और शासकीय सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है।

5 दिन की मोहलत, उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश

बीईओ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि प्राचार्य ने अनुमति से दोगुने पेड़ काटकर राजस्व और वन विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। बीईओ ने इस मामले की राजस्व और वन विभाग से उच्च स्तरीय जांच कराने का सुझाव दिया है।

इस रिपोर्ट के आधार पर सरगुजा डीईओ ने प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी कर 5 दिनों के भीतर लिखित जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर प्राचार्य के खिलाफ निलंबन और एफआईआर (FIR) जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

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