बिलासपुर…हरिओम अस्पताल में आदिवासी महिला तिलबसिया बाई की मौत के बाद शव रोकने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पहले अस्पताल प्रबंधन पर बकाया राशि के नाम पर दो दिनों तक शव रोकने के आरोप लगे थे, वहीं अब अस्पताल में हुई बातचीत के दौरान डॉ. अभिषेक कश्यप का यह कथित बयान सामने आया कि शव को आईसीयू में रखा गया था, इसलिए उसका अलग से शुल्क लिया जाएगा। इस बयान के बाद पूरे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।

जानकारी के अनुसार मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम नेउर निवासी आदिवासी महिला तिलबसिया बाई की 28 जुलाई को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल ने भारी-भरकम बिल बनाकर भुगतान की शर्त पर शव रोक लिया। मृतका के पति जगन्नाथ ने बताया कि पैसे का इंतजाम करने के लिए उन्हें दो बार गांव लौटना पड़ा, लेकिन हर बार अस्पताल ने पूर्ण भुगतान के बिना शव देने से इनकार कर दिया।

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घटना की जानकारी सामने आने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय केशरवानी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ पहले कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मिले। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी देते हुए अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, मजिस्ट्रियल जांच कराने तथा मृतका के परिजनों को तत्काल न्याय दिलाने की मांग की। प्रशासन से हस्तक्षेप का आग्रह करने के बाद सांसद ज्योत्सना महंत के निर्देश पर विजय केशरवानी पीड़ित परिवार को वापस बिलासपुर लेकर हरिओम अस्पताल पहुंचे, जहां डॉ. अभिषेक कश्यप से उनकी तीखी बहस हुई और पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया।

मामले की जानकारी मिलने के बाद सांसद ज्योत्सना महंत के निर्देश पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय केशरवानी अपने साथियों के साथ पीड़ित परिवार को वापस बिलासपुर लेकर हरिओम अस्पताल पहुंचे। उस समय परिवार अपने गांव लौट रहा था, लेकिन विजय केशरवानी के संपर्क के बाद बीच रास्ते से वापस बुलाया गया। अस्पताल में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल और डॉ. अभिषेक कश्यप के बीच लंबी और तीखी बहस हुई।

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बहस के दौरान डॉ. अभिषेक कश्यप ने कथित रूप से कहा कि शव को आईसीयू में रखा गया था, इसलिए उसका चार्ज लिया जाएगा। इस पर विजय केशरवानी ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार सुना है कि किसी मृत व्यक्ति के शव को आईसीयू में रखकर उसका बिल बनाया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि आईसीयू जीवित गंभीर मरीजों के इलाज के लिए होता है, जबकि शव संरक्षण के लिए निर्धारित तापमान वाली मर्चुरी की व्यवस्था होती है। यदि अस्पताल में मर्चुरी नहीं थी तो शव को जिला अस्पताल या सिम्स भेजा जाना चाहिए था।

विजय केशरवानी ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने पहले शव को दो दिनों तक रोके रखा और बाद में आईसीयू में रखने का शुल्क भी जोड़ दिया। उन्होंने यह भी कहा कि गुरुवार रात हरिओम अस्पताल प्रबंधन, डॉ. अभिषेक कश्यप और उनके एक अन्य चिकित्सक साथी ने पैसे देकर लोगों का मुंह बंद करने का प्रयास किया। विजय केशरवानी के अनुसार यह पूरे मामले को दबाने की कोशिश थी। उन्होंने कहा कि यदि एक ओर गरीब आदिवासी परिवार को अपनी पत्नी का शव पाने के लिए भटकना पड़े और दूसरी ओर खबर दबाने के लिए धन का सहारा लिया जाए, तो इससे बड़ी संवेदनहीनता और क्या हो सकती है।

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कांग्रेस नेताओं के निजी प्रयास और सेवा भारती के सहयोग से एम्बुलेंस की व्यवस्था कराई गई। इसके बाद गुरुवार रात करीब 9 बजे जिला अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को एम्बुलेंस सहित अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराकर उनके गांव रवाना किया गया।

गौरतलब है कि मृतका तिलबसिया बाई स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के विधानसभा क्षेत्र तथा सांसद ज्योत्सना महंत के संसदीय क्षेत्र की निवासी थीं। इस पूरे मामले ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन और मरीजों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विजय केशरवानी ने कहा कि यदि अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर, मजिस्ट्रियल जांच और कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस इस मुद्दे पर व्यापक और उग्र जनआंदोलन करेगी।