बिलासपुर…बिलासपुर नगर निगम वर्षों से आर्थिक तंगी का हवाला देता रहा है। कभी सफाई कर्मचारियों के वेतन के लिए राशि कम पड़ जाती है, कभी बिजली बिल और दूसरी जरूरी देनदारियों को लेकर निगम की वित्तीय हालत चर्चा में रहती है। लेकिन अब निगम के भीतर से सामने आई जानकारी ने उसके खर्चों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

निगम के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, सामान्य सभा और अन्य बैठकों के दौरान बैग वितरण पर करीब 5 लाख रुपये तथा दीपावली के अवसर पर मिठाई वितरण पर करीब 6 लाख रुपये खर्च किए गए। कुल मिलाकर लगभग 11 लाख रुपये के इस खर्च को लेकर निगम के भीतर ही चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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सूत्रों का कहना है कि सामान्य सभा के दौरान 70 पार्षदों के अलावा कुछ अन्य लोगों को भी बैग दिए गए। दावा है कि बैग मुंबई से मंगवाए गए और स्थानीय व्यापारी के माध्यम से उनकी खरीद हुई। हालांकि निगम के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि कुल करीब 120 बैग ही मंगाए गए थे और उनकी वास्तविक लागत लगभग एक लाख रुपये के आसपास हो सकती है। ऐसे में शेष राशि किस मद में खर्च हुई, यह सवाल निगम के भीतर भी उठ रहा है।

दीपावली पर मिठाई वितरण को लेकर भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक करीब 6 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए, जबकि कई कर्मचारियों और कुछ जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर मिठाई वितरण उन्हें दिखाई नहीं दिया। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर छह लाख रुपये की मिठाई गई कहां और किसे मिली?

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नगर निगम की वित्तीय स्थिति किसी से छिपी नहीं है। कई मौकों पर कर्मचारियों के वेतन में देरी हुई, सफाई व्यवस्था के लिए संसाधनों की कमी की बात कही गई और जरूरी भुगतान के लिए भी निगम को संघर्ष करना पड़ा। ऐसे में बैग और मिठाई जैसे मदों पर लाखों रुपये खर्च होने के दावे ने लोगों को चौंका दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर निगम बार-बार आर्थिक तंगी की बात करता है, तब बैग और मिठाई पर लाखों रुपये खर्च करने की प्राथमिकता कैसे तय हुई? यदि खर्च नियमानुसार हुआ है, तो खरीद प्रक्रिया, भुगतान, वितरण सूची और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि सभी संदेह दूर हो सकें।

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शहर में चर्चा का विषय यही है कि जिस नगर निगम के पास सफाई व्यवस्था और कर्मचारियों के वेतन के लिए पैसे नहीं होने की बात कही जाती है, उसी निगम में बैग और मिठाई पर लाखों रुपये खर्च होने के दावों का जवाब आखिर कौन देगा?