बिलासपुर… आदिवासी इलाकों में विकास योजनाओं की रफ्तार, जमीन से जुड़े विवाद और छात्रावासों में सीमित सीटों की समस्या को लेकर प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण सोनमणि बोरा ने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर काम तेज करने के निर्देश दिए। विभागीय योजनाओं की समीक्षा के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि आदिवासियों की जमीन से जुड़े मामलों और पेसा के उल्लंघन की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसे मामलों की जांच और कार्रवाई के लिए गठित मुख्यमंत्री टास्क फोर्स के स्तर पर प्रकरणों को रखा जाएगा।

प्रमुख सचिव ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास की योजनाएं पहुंच रही हैं, लेकिन जहां अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, वहां प्रशासन को अधिक गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने माना कि कुछ दूरस्थ क्षेत्रों में योजनाओं का लाभ अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर विकास कार्यों को गति देने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।

पेसा उल्लंघन और आदिवासी जमीन पर नजर

आदिवासी क्षेत्रों में जमीन के उपयोग और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े सवाल पर बोरा ने कहा कि मामला गंभीर है। उन्होंने बताया कि राज्य में पेसा के अलावा आदिवासी हितों की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में टास्क फोर्स गठित है। सामान्य प्रशासन और अधिकारों से जुड़े ऐसे मामलों को टास्क फोर्स के संज्ञान में लाया जाएगा। उन्होंने कलेक्टर से भी संबंधित मामलों की जानकारी लेकर रिपोर्ट प्राप्त करने और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की बात कही।

यह मुद्दा खासतौर पर आदिवासी बहुल और दूरस्थ क्षेत्रों में जमीन के उपयोग को लेकर उठ रहे विवादों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। बोरा ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास के नाम पर आदिवासी हित प्रभावित न हों और पात्र लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिले।

PMGSY ने बिछाया सड़कों का जाल

दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सड़क संपर्क को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने बिलासपुर जिले में सड़क निर्माण की प्रगति को भी रेखांकित किया और कहा कि जहां जरूरत होगी, वहां दूरस्थ गांवों तक सड़क पहुंचाने के प्रयास जारी रहेंगे।

उन्होंने बताया कि हाल में क्षेत्रों का सर्वेक्षण भी किया गया है। ऐसे छोटे गांव या पात्र परिवार, जो अब तक किसी योजना के लाभ से छूट गए हैं, उनकी पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। आवास, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को आदिवासी क्षेत्रों के विकास की प्राथमिकता से जोड़कर काम करने की बात उन्होंने कही।

छात्रवृत्ति में देरी नहीं, समय पर करे आवेदन 

विभागीय समीक्षा बैठक में छात्रवृत्ति योजना भी प्रमुख एजेंडे में रही। बोरा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विद्यार्थी निर्धारित समय-सीमा में आवेदन कर सकें, इसके लिए संस्था प्रमुखों के साथ बैठक कर पूरी प्रक्रिया स्पष्ट की जाए। नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को भी पात्रता के अनुसार छात्रवृत्ति का लाभ मिले, इसके लिए समय पर आवेदन कराने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष छात्रवृत्ति के क्षेत्र में बेहतर परिणाम मिले हैं और इस वर्ष भी अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना से जोड़ना लक्ष्य है। महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों के आवेदन के लिए संबंधित संस्थानों के प्रमुखों को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि निजी संस्थानों से जुड़े मामलों में जिला स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने की बात कही गई।

छात्रावास, अन्य वर्गों का बढ़ाया 20% कोटा

आदिवासी छात्रावासों की स्थिति और प्रवेश के लिए सीमित सीटों से जुड़ी समस्या पर भी प्रमुख सचिव ने महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर छात्रावासों की मांग अधिक है, जबकि कुछ छात्रावासों में निर्धारित वर्ग के विद्यार्थियों की संख्या कम है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए अन्य वर्गों के विद्यार्थियों के लिए निर्धारित कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने पर निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि ऐसे छात्रावास जहां संबंधित वर्ग के पर्याप्त विद्यार्थी उपलब्ध नहीं हैं, वहां अन्य वर्गों के पात्र विद्यार्थियों के लिए भी प्रवेश का रास्ता खोला जाएगा। इससे खाली क्षमता का उपयोग हो सकेगा और जरूरतमंद विद्यार्थियों को रहने की सुविधा मिल सकेगी।

नए छात्रावास और किराये की तैयारी

बोरा ने कहा कि जिला और संभाग मुख्यालयों में छात्रावासों की बढ़ती मांग को देखते हुए नए छात्रावासों के निर्माण पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही ऐसी योजना लाने की तैयारी है, जिसमें पात्र विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सरकारी या निजी छात्रावास में रहने की सुविधा मिल सके और निर्धारित पात्रता के आधार पर किराये का भार शासन उठा सके।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ छात्रावासों में जलभराव और अन्य बुनियादी समस्याएं सामने आई हैं। इन समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता से करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।

पीएम जनमन और धरती आबा अभियान की समीक्षा

समीक्षा बैठक में पीएम जनमन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, आदर्श ग्राम योजना, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, प्रयास आवासीय विद्यालय, छात्र-छात्राओं की कोचिंग, पठन सामग्री और गणवेश वितरण सहित कई योजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई।

बोरा ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं की सफलता केवल स्वीकृति और कागजी प्रगति से तय नहीं होगी। वास्तविक मूल्यांकन इस बात का होना चाहिए कि पात्र व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचा या नहीं। उन्होंने मैदानी अधिकारियों को नियमित निगरानी और समस्याओं के तत्काल निराकरण के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। प्रशासन को ऐसे क्षेत्रों में योजनाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम करना होगा।