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Chhattisgarh

खेत में अफीम लहलहाई, गिरदावरी में ‘अन्य अनाज’ — बलरामपुर में बड़ा सवाल

सीमावर्ती चंदाडांडी में लहलहाती मिली अफीम की फसल, पुलिस ने खेत पर डेरा डाला

बलरामपुर (पृथ्वी लाल केशरी).. जिले में अवैध अफीम की खेती को लेकर हालात अचानक गंभीर हो गए हैं। एक के बाद एक सामने आए मामलों ने पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को सतर्क कर दिया है। कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी गांव में करीब तीन एकड़ जमीन पर अफीम की खेती मिलने के अगले ही दिन करोंधा थाना क्षेत्र के चंदाडांडी गांव में भी खेत में अफीम की फसल लहलहाने की सूचना सामने आई।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके की जांच शुरू कर दी। खेत की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मौके पर ही डेरा डाल दिया। पूरी रात निगरानी की व्यवस्था रखी गई और खेत के साथ आसपास के इलाके पर भी नजर रखी गई ताकि किसी तरह के साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके।

स्थानीय जानकारी के मुताबिक चंदाडांडी गांव झारखंड सीमा से लगा हुआ इलाका है। सीमावर्ती स्थिति को देखते हुए पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं अवैध खेती का नेटवर्क सीमा पार क्षेत्रों से तो नहीं जुड़ा है। फिलहाल पुलिस इस बात की पड़ताल में जुटी है कि अफीम की खेती के पीछे किन लोगों की भूमिका है और इसमें कौन-कौन शामिल हो सकते हैं। मामले की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।

गिरदावरी रिपोर्ट ने बढ़ाया विवाद

अफीम की खेती के इस खुलासे के बीच सामने आई एक गिरदावरी रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। जिस भू-खंड पर प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान अफीम की खेती मिलने की बात सामने आई थी, उसी जमीन की गिरदावरी में फसल को ‘अन्य अनाज’ दर्ज किया गया है।

यानी मौके पर अफीम की खेती मिलने का दावा और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज फसल—दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।

राजनीतिक आरोपों से मामला और गरमाया

स्थानीय स्तर पर हुई कार्रवाई के दौरान यह बात भी सामने आई थी कि संबंधित खेत में अफीम की खेती एक भाजपा नेता की निगरानी में की जा रही थी। इसके बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया और विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया।

अब गिरदावरी रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष का आरोप और तीखा हो गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि अगर मौके पर अफीम की खेती मिली थी तो सरकारी दस्तावेजों में उसे ‘अन्य अनाज’ क्यों दर्ज किया गया।

उनका आरोप है कि मामले को हल्का दिखाने के लिए कागजों में फसल की श्रेणी बदल दी गई।

प्रशासनिक चुप्पी पर भी उठे सवाल

दूसरी ओर प्रशासन की तरफ से इस विरोधाभास पर अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। अधिकारी सिर्फ इतना कह रहे हैं कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और गिरदावरी रिपोर्ट की भी समीक्षा की जाएगी।

जिले में इस मुद्दे पर चर्चा का एक और पहलू सामने आ रहा है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसी विसंगतियां सामने आ रही हैं तो निगरानी तंत्र की जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी।

पुराना सवाल फिर सामने

बलरामपुर और आसपास के क्षेत्रों में पहले भी अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आते रहे हैं। कई बार कार्रवाई भी हुई, लेकिन हर बार यही सवाल उठता रहा कि इतनी बड़ी खेती प्रशासन की नजर से आखिर कैसे बच जाती है।

अब लगातार दो दिनों में सामने आए मामलों और गिरदावरी रिपोर्ट के विरोधाभास ने बहस को और तेज कर दिया है। सवाल सिर्फ अवैध खेती का नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता का भी बन गया है।

जांच के बाद जिम्मेदारी किस पर तय होगी और क्या सच में अफीम को ‘अन्य अनाज’ बनाने वालों तक कार्रवाई पहुंचेगी—इस पर अब सबकी नजर टिकी है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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