बिलासपु… जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक शुक्रवार को अफसरों की जवाबदेही को लेकर कई बार गरमा गई। पेयजल, नल-जल योजना, धान खरीदी, स्वास्थ्य, सड़क और अवैध खनन जैसे मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से सीधे जवाब मांगे। पुराने निर्देशों का पालन नहीं होने पर सदस्यों ने नाराजगी जताई। सबसे ज्यादा घेराबंदी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की हुई, जहां अधिकारियों की ओर से बार-बार बजट और संसाधनों की कमी का हवाला दिए जाने पर बेलतरा विधायक प्रतिनिधि उमेश गौरहा ने तंज कसा—“लगता है भाजपा सरकार में कर्मचारी बहुत दुखी हैं।”

जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूरवंशी की अध्यक्षता और जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल की मौजूदगी में हुई बैठक में विभागवार पालन प्रतिवेदन रखा गया। जनप्रतिनिधियों ने कागजों में हुए काम के बजाय जमीन पर स्थिति का हिसाब मांगा और कई मामलों में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।

पीएचई पर सवालों की बौछार

नल-जल योजना और जल जीवन मिशन के कार्यों, हैंडपंपों की मरम्मत और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट को लेकर पीएचई अधिकारियों से जवाब मांगा गया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि कहीं पाइप लाइन बिछी है तो टंकी नहीं, कहीं टंकी बनी है तो पाइप लाइन अधूरी है। पाइप बिछाने की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे।

कोटा, तखतपुर समेत कई क्षेत्रों में पेयजल संकट और खराब हैंडपंपों का मुद्दा उठाते हुए सदस्यों ने पूछा कि पुराने निर्देशों के बाद भी समस्याएं दूर क्यों नहीं हुईं। अधिकारियों ने हैंडपंपों की मरम्मत और सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचने की बात कही। कुछ मामलों में मशीनरी, पाइप और बजट की कमी के कारण काम में देरी का हवाला दिया गया।

इसी पर गौरहा ने सवाल उठाया कि जब सरकार पर्याप्त राशि उपलब्ध होने की बात कहती है तो ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान में बार-बार बजट की कमी क्यों सामने आ रही है। उन्होंने कहा, “लगता है भाजपा सरकार में कर्मचारी बहुत दुखी हैं।” उनका कहना था कि नल-जल और जल जीवन मिशन की योजनाओं का असर जमीन पर दिखना चाहिए।

सूर्यवंशी बोले- बजट नहीं है तो कहीं से व्यवस्था करें

गौरहा की टिप्पणी के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूरवंशी ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि जनप्रतिनिधि जनता के बीच वोट मांगने जाते हैं और वहां उन्हें जनता की समस्याओं का जवाब देना पड़ता है। इसलिए जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से लिया जाए।

सूर्यवंशी  ने कहा कि यदि बजट नहीं है तो इधर-उधर से बजट की व्यवस्था कर जनप्रतिनिधियों की बताई समस्याओं का काम पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि जनता की परेशानी दूर करना प्राथमिकता होनी चाहिए और बैठक में उठे मुद्दे केवल कार्यवाही तक सीमित नहीं रहने चाहिए।

धान खरीदी की तैयारी पर सहकारिता विभाग घिरा

सहकारिता विभाग से धान खरीदी केंद्रों की तैयारियों को लेकर सवाल हुए। जनप्रतिनिधियों ने कई केंद्रों पर चबूतरे और गोदाम की व्यवस्था नहीं होने की शिकायत की। उनका कहना था कि अस्थायी व्यवस्था में खुले में धान रखने से बारिश के दौरान नुकसान का खतरा रहता है।

उरतुम्ब  कुरदर समेत कई गांवों का हवाला देते हुए सदस्यों ने कहा कि कागजों में व्यवस्था दिखाई देती है, लेकिन मौके पर स्थिति अलग है। समितियों में कथित गड़बड़ियों और प्रबंधकों की भूमिका पर भी सवाल उठे। कार्रवाई के बाद कुछ प्रबंधकों को दोबारा जिम्मेदारी मिलने की शिकायत पर सहकारिता विभाग के अधिकारी ने कहा कि ऐसे मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। चबूतरों के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी भी दी गई।

खाद-बीज पर्याप्त, फसल बीमारी पर सतर्कता

कृषि विभाग ने खाद और बीज का पर्याप्त स्टॉक होने की जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराई जा रही है और आवश्यकता बढ़ने पर अतिरिक्त व्यवस्था की जाएगी। पुराने बीज के स्टॉक के उपयोग की भी जानकारी दी गई। जनप्रतिनिधियों ने बारिश के दौरान फसलों में होने वाली बीमारियों को लेकर सतर्क रहने और किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए।

डॉक्टरों की कमी और अनुपस्थिति पर सवाल

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी और चिकित्सकों के समय पर नहीं पहुंचने का मुद्दा उठा। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि कई सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति खराब है।

कोटा में डॉक्टरों के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने की शिकायत पर सीएमएचओ शुभ्रा  गढेवाल ने औचक निरीक्षण कर कार्रवाई की बात कही। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी स्वीकार करते हुए बताया कि कुछ जगह भवन भी जर्जर हैं। समस्याओं के समाधान के लिए जिला खनिज न्यास निधि से सहयोग का प्रस्ताव रखने की बात कही गई।

जनप्रतिनिधियों ने डॉक्टरों की कमी दूर करने के साथ कुछ क्षेत्रों में पोस्टमार्टम सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल ने प्रस्ताव मिलने पर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

जर्जर सड़कों पर भी घेरा

लोक निर्माण विभाग से जिले की खराब सड़कों को लेकर जवाब मांगा गया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि कई जगह सड़कें जर्जर हैं और निर्माण सामग्री सड़क पर रखे जाने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। विभागीय अधिकारी ने बताया कि बारिश के दौरान पैचिंग और मरम्मत का काम जारी है तथा मौसम खुलने के बाद स्थायी सुधार किया जाएगा।

उमेश गौरहा ने कहा कि सड़कों की हालत नहीं सुधरी तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

अवैध उत्खनन पर खनिज विभाग से जवाब

खनिज विभाग ने स्वीकृत रेत खदानों और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई की जानकारी दी। जनप्रतिनिधियों ने इसके बावजूद कई क्षेत्रों में अवैध रेत उत्खनन की शिकायतों का हवाला देते हुए विभाग से स्पष्ट जवाब मांगा।

बैठक में संबंधित अधिकारी की अनुपस्थिति पर भी सदस्यों ने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि जिसे बैठक में बुलाया गया है, उसे उपस्थित होकर जनप्रतिनिधियों के सवालों का जवाब देना चाहिए।

पालन प्रतिवेदन से ज्यादा जवाबदेही पर जोर

सामान्य सभा में बार-बार यह सवाल उठा कि पुराने निर्देशों का पालन कितना हुआ और जनता की समस्या वास्तव में कितनी दूर हुई। जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से कहा कि बैठक में दिए गए निर्देश कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए।

कई बार बहस तेज हुई, लेकिन अध्यक्ष राजेश सूरवंशी ने हस्तक्षेप कर अधिकारियों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और जरूरत पड़ने पर बजट की वैकल्पिक व्यवस्था कर काम पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में गौरहा का बजट को लेकर तंज और सूरवंशी का ‘इधर-उधर से बजट एडजस्ट कर काम पूरा करने’ का निर्देश सबसे चर्चित रहा। दोनों बयानों के बीच सामान्य सभा में उठी मूल बात भी साफ रही—जनता की समस्या का समाधान कागज पर नहीं, जमीन पर दिखाई देना चाहिए।