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iss mission bravery- राकेश शर्मा के बाद स्पेस में रचा इतिहास, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र देने की तैयारी, जानें उनकी शौर्य गाथा

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर अपने ऐतिहासिक स्पेस मिशन के दौरान असाधारण साहस के लिए देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया जा सकता है. शुभांशु ने मिशन के दौरान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उन्होंने अदम्य साहस और सूझबूझ के साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन कर भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया. उनकी असाधारण बहादुरी के लिए अशोक चक्र के लिए रिकमेंड किया गया है.

iss mission bravery/भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष की गहराइयों में न केवल तिरंगा फहराया है, बल्कि अपने अदम्य साहस और सूझबूझ से पूरी दुनिया में भारत का मान बढ़ाया है।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर अपने ऐतिहासिक मिशन के दौरान प्रदर्शित की गई उनकी असाधारण बहादुरी के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित करने की सिफारिश की गई है। यह सम्मान न केवल शुभांशु की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक भी है।

शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 (Axiom-4) मिशन के तहत तीन अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतरिक्ष की यात्रा की थी। उन्होंने 25 जून 2025 को इस चुनौतीपूर्ण सफर के लिए उड़ान भरी और करीब 20 दिनों तक अंतरिक्ष में बिताने के बाद 14 जुलाई को सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लौटे।

विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद शुभांशु शुक्ला दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं जिन्होंने अंतरिक्ष की अनंत सीमाओं को स्पर्श किया है। उनके इस मिशन ने भारत की अंतरिक्ष यात्राओं के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।iss mission bravery

अंतरिक्ष का वातावरण जितना रोमांचक होता है, उतना ही खतरनाक और चुनौतीपूर्ण भी। मिशन के दौरान शुभांशु को माइक्रोग्रैविटी, उच्च विकिरण (रेडिएशन) और अत्यधिक शारीरिक व मानसिक तनाव जैसी कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

अंतरिक्ष में मांसपेशियों का नुकसान और शारीरिक क्रियाओं में बदलाव जैसे स्वास्थ्य जोखिमों के बावजूद, उन्होंने विचलित हुए बिना अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। प्रतिकूल परिस्थितियों में उनकी इसी एकाग्रता और शांत स्वभाव ने उन्हें इस सर्वोच्च सम्मान का हकदार बनाया है।iss mission bravery

अपनी 20 दिनों की यात्रा के दौरान ग्रुप कैप्टन शुभांशु ने केवल यात्रा ही नहीं की, बल्कि विज्ञान की प्रगति के लिए 60 से अधिक जटिल प्रयोगों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इनमें जैव चिकित्सा विज्ञान, तंत्रिका विज्ञान, कृषि, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल थे। उनके द्वारा किए गए ये प्रयोग आने वाले समय में मानव जाति के लिए अंतरिक्ष यात्रा को और अधिक सुलभ और सुरक्षित बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले शुभांशु शुक्ला का यहां तक पहुंचने का सफर बेहद प्रेरणादायक है। नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से स्नातक करने के बाद वे साल 2006 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए थे। अपनी काबिलियत के दम पर साल 2019 में उन्हें भारत के महत्वाकांक्षी ‘गगनयान’ मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चुना गया था। आज उनकी इस सफलता पर न केवल लखनऊ बल्कि पूरा देश गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

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