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Chhattisgarh

CG Vidhansabha-भ्रष्टाचार पर अभयदान या कछुआ चाल? BEO पर 6 साल से जांच प्रक्रियाधीन

महासमुंद जिले के बसना विकासखंड में वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान हुई भारी वित्तीय अनियमितता और गबन का मामला विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने विधानसभा में उठाया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटाले की जांच बीते छह साल से केवल 'प्रक्रियाधीन' ही बनी हुई है।

CG Vidhansabha/रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में व्याप्त प्रशासनिक शिथिलता और भ्रष्टाचार के मामलों पर चल रही ‘कछुआ चाल’ जांच ने एक बार फिर पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा दिए गए लिखित जवाबों ने यह साफ कर दिया है कि विभाग में गबन और फर्जीवाड़े के बड़े मामलों में दोषियों पर त्वरित कार्रवाई करने के बजाय फाइलों को सालों तक उलझाकर रखा जा रहा है।

CG Vidhansabha/विशेष रूप से बसना विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के खिलाफ छह साल से चल रही जांच और व्यावसायिक प्रशिक्षक भर्ती घोटाले में पुलिसिया कार्रवाई में हो रही देरी ने सदन में भारी गरमागरमी पैदा कर दी है।

महासमुंद जिले के बसना विकासखंड में वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान हुई भारी वित्तीय अनियमितता और गबन का मामला विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने विधानसभा में उठाया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटाले की जांच बीते छह साल से केवल ‘प्रक्रियाधीन’ ही बनी हुई है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अपने लिखित जवाब में स्वीकार किया कि सहायक संचालक स्तर के अधिकारियों, अमर दास कुर्रे और अरुण कुमार दास द्वारा की गई जांच में वित्तीय अभिलेखों का अपूर्ण होना और संबंधित लिपिक द्वारा प्रभार न दिया जाना पाया गया था।

हालांकि, इतने स्पष्ट प्रमाण और गबन की पुष्टि होने के बावजूद तत्कालीन बीईओ के खिलाफ अब तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है। मंत्री के अनुसार, दोषी बीईओ के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही अभी भी प्रक्रिया में है, जबकि केवल एक कक्ष प्रभारी लिपिक को निलंबित कर विभागीय जांच की जा रही है। छह साल की लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी मुख्य अधिकारी को सजा न मिलना प्रशासनिक ‘अभयदान’ की ओर इशारा करता है।

शिक्षा विभाग में व्याप्त अव्यवस्था का दूसरा बड़ा उदाहरण व्यावसायिक प्रशिक्षक (वोकेशनल ट्रेनर) भर्ती प्रक्रिया में सामने आया है। इस मुद्दे पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक ने सरकार से तीखे सवाल पूछे। विभाग ने दिसंबर 2025 में ही यह स्वीकार किया था कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों को ताक पर रखकर गड़बड़ी की गई है और इसके लिए रायपुर पुलिस अधीक्षक को दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज करने हेतु पत्र भी लिखा गया था। लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अब तक इस बड़े घोटाले में किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। मंत्री ने सदन में बताया कि पुलिस जांच अभी चल रही है और मामला फिलहाल विवेचनाधीन है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह बात साफ तौर पर सामने आई थी कि भर्ती के नाम पर ‘तृतीय पक्षों’ द्वारा अवैध लेनदेन (रिश्वतखोरी) की शिकायतें मिली हैं, जो कि जांच का मुख्य विषय है।

इस भर्ती घोटाले में शामिल निजी संस्थाओं के खिलाफ अनुबंध रद्द करने की कार्रवाई को लेकर भी विभाग का रवैया ढुलमुल नजर आ रहा है। जुलाई 2025 में जारी कार्य आदेशों में स्पष्ट शर्त थी कि शिकायत प्राप्त होने पर अनुबंध तत्काल समाप्त किया जा सकता है, लेकिन मंत्री ने सदन को सूचित किया कि चूंकि मामला पुलिस की जांच में है, इसलिए फिलहाल अनुबंध समाप्ति जैसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विधायक कौशिक ने सवाल उठाया कि जब विभाग ने स्वयं अपनी प्रारंभिक जांच में अनियमितता स्वीकार की है और पुलिस को एफआईआर के लिए पत्र लिखा है, तो फिर इन दागी संस्थाओं को अब तक काम जारी रखने की अनुमति क्यों दी जा रही है?

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