इंदौर।मध्य प्रदेश के इंदौर क्षेत्र से एक बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़) के मूल निवासी एक प्रवासी परिवार की तीन मासूम सगी बहनों की संदिग्ध फूड पॉइजनिंग के कारण मौत हो गई।

मृतकों में 10 वर्षीया आशी, 8 वर्षीया विशुका और 6 वर्षीया विधि शामिल हैं। बच्चियों के माता-पिता की हालत भी गंभीर बनी हुई है और उनका अस्पताल में इलाज जारी है।

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मूलतः जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मुलमुला/मुरलीडीह निवासी नरेंद्र सिंह सांडे इंदौर के समीप पीथमपुर स्थित एल एंड टी कंपनी में काम करते हैं। वे अपनी पत्नी अमरोतिन और तीनों बेटियों के साथ बेटमा थाना क्षेत्र की लाइफ सिटी कॉलोनी में रह रहे थे।

परिजनों और पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 23 अगस्त की शाम परिवार ने पिज्जा खाया था और इसके बाद वे अपने एक पारिवारिक मित्र के घर पर आयोजित भोज में शामिल हुए, जहां दाल-बाटी का सेवन किया गया। उसी रात देर रात परिवार के सभी सदस्यों को अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी और सभी की सेहत बिगड़ने लगी।

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दो बहनों ने इंदौर में तोड़ा दम, रास्ते में तीसरी ने ली अंतिम सांस

तबीयत अधिक बिगड़ने पर 8 वर्षीया विशुका और 6 वर्षीया विधि को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान दोनों मासूमों ने दम तोड़ दिया। बेटियों की अचानक हुई मौत से बेसुध परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए ही एम्बुलेंस से दोनों के शव लेकर अपने पैतृक गांव लौटने लगे।

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लेकिन त्रासदी यहीं खत्म नहीं हुई। रास्ते में एम्बुलेंस के भीतर ही सबसे बड़ी बेटी आशी की हालत भी तेजी से बिगड़ने लगी। परिजन आनन-फानन में एम्बुलेंस को इटारसी के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शासकीय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद आशी को भी बचाया नहीं जा सका।

फॉरेंसिक जांच और सैंपल कलेक्शन जारी

मामले की सूचना मिलते ही इटारसी पुलिस ने मर्ग कायम कर तीनों बच्चियों के शवों का पोस्टमार्टम कराया है और फॉरेंसिक जांच के लिए बिसरा सैंपल सुरक्षित रख लिए हैं। बेटमा पुलिस ने परिजनों के निवास स्थान से पानी और खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर मामले की गहन छानबीन शुरू कर दी है।

थाना प्रभारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में फूड पॉइजनिंग को ही मौत का मुख्य कारण माना जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट होना बाकी है कि जहर पिज्जा से फैला, दाल-बाटी से, या दूषित पानी से। बिसरा जांच और फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों की असली वजह पूरी तरह साफ हो पाएगी।