जशपुर/बगिया (मनीष जायसवाल)। करीब 82 हजार शिक्षकों के टीईटी की अनिवार्यता से प्रभावित होने की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विभागीय टीईटी के जरिए रास्ता निकालने का भरोसा दिया है। इसे सिर्फ एक घोषणा या उस समय हुई बातचीत मानकर नहीं देखा जा सकता। जशपुर जिले के शिक्षक नेता टिकेश्वर भोय इसे शिक्षकों की परेशानी दूर करने की दिशा में साय सरकार का बड़ा फैसला मानते हैं।

 

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बीते कई दिनों से शिक्षक संगठनों के बीच बातचीत, आंदोलन की तैयारी और सरकार से बात करने की कोशिश में लगे टिकेश्वर भोय का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इस मामले को सिर्फ टीईटी पास करने की शर्त के रूप में नहीं देखा। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि ये शिक्षक कौन हैं, कहां से आए हैं और किन हालात में शिक्षक बने..। भोय के मुताबिक मुख्यमंत्री ने उन हजारों परिवारों की चिंता को समझा है, जिनका घर शिक्षक की नौकरी से चलता है और बच्चों का भविष्य भी इसी नौकरी से जुड़ा है।

 

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भोय बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में शिक्षक बनने वाले लोगों का एक बड़ा हिस्सा गांव और दूर-दराज के इलाकों से आया है। डॉ. रमन सिंह की 15 साल की सरकार के दौरान एक लाख से ज्यादा लोगों को शिक्षक के रूप में रोजगार मिला। इनमें 70 हजार से ज्यादा शिक्षक ग्रामीण इलाकों से हैं। करीब 50 हजार शिक्षक ऐसे इलाकों से आए, जहां राज्य बनने के बाद भी कई साल तक सड़क जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं थीं। कई शिक्षक ऐसे गांवों से निकले, जहां कभी स्कूल तक नहीं हुआ करता था।

 

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भोय कहते हैं कि ऐसे गांवों और परिवारों से निकलकर शिक्षक बनने वाले लोगों के लिए मुख्यमंत्री का सामने आकर रास्ता निकालने का भरोसा देना बड़ी बात है। शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता सिर्फ परीक्षा देने का मामला नहीं है। इससे उनकी नौकरी और परिवार दोनों जुड़े हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री ने करीब 82 हजार शिक्षकों का जिक्र करते हुए जब कहा कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा, तो शिक्षकों को लगा कि सरकार उनकी परेशानी को समझ रही है।

 

दिन में स्कूल शिक्षा मंत्री के साथ चर्चा के बाद शिक्षक नेताओं का प्रतिनिधिमंडल रात करीब 11 बजे मुख्यमंत्री के बगिया स्थित निवास पहुंचा। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के साथ बैठकर बातचीत की। इस दौरान तीन महिला शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने उन्हें उपहार में शिक्षकों की नौकरी को लेकर भरोसा दिलाया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागीय परीक्षा के जरिए शिक्षकों को टीईटी की पात्रता हासिल करने का रास्ता बनाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जरूरत के अनुसार विभागीय टीईटी तीन बार तक कराई जाएगी। भोय के मुताबिक मुख्यमंत्री के इस भरोसे के बाद आंदोलन स्थगित किया गया।

 

टिकेश्वर भोय के मुताबिक इस मामले में मुख्यमंत्री की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्कूल शिक्षा विभाग उनके पास नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने शिक्षकों की परेशानी को गंभीरता से लिया। भोय कहते हैं कि विभाग का काम अलग हो सकता है, लेकिन जब किसी फैसले से हजारों शिक्षक और उनके परिवार प्रभावित होते हैं तो मुख्यमंत्री को उनकी चिंता करनी चाहिए। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यही किया।

 

पदोन्नति के मामले में भी मुख्यमंत्री ने न्यायालय से जुड़े मुद्दों को देखते हुए वरिष्ठ शिक्षकों के हितों का ध्यान रखने का भरोसा दिया। सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति का मुद्दा भी उनके सामने रखा गया। इस पर मुख्यमंत्री ने संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने की बात कही।

 

भोय का कहना है कि शिक्षक आंदोलन का मकसद सरकार से लड़ाई बढ़ाना नहीं है। शिक्षक अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं और उसका हल चाहते हैं। मुख्यमंत्री से मिले भरोसे के बाद आंदोलन स्थगित किया गया। उनके मुताबिक इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की परेशानी को आगे टालने के बजाय उनसे बात की और रास्ता निकालने का भरोसा दिया।

 

टिकेश्वर भोय कहते हैं कि मुख्यमंत्री ने 82 हजार शिक्षकों को सिर्फ एक संख्या की तरह नहीं देखा। उन्होंने समझा कि इस संख्या के पीछे हजारों परिवार हैं। एक शिक्षक की नौकरी पर संकट आता है तो उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। मुख्यमंत्री ने समय रहते इस चिंता को अपनी चिंता माना, यही इस फैसले की सबसे बड़ी बात है।