Bilaspur
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में ‘सांस्कृतिक मूल्य एवं हिन्दी साहित्य’ पर विमर्श एवं भव्य कवि सम्मेलन
साहित्य सृजन हेतु डॉ. विनय पाठक, डॉ. अजय पाठक सहित विभूतियाँ सम्मानित

बिलासपुर | अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर एवं पीएम-ऊषा (PM-USHA) के संयुक्त तत्वावधान में आज विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग (UTD) में “सांस्कृतिक मूल्यों एवं हिन्दी साहित्य” विषय पर एक दिवसीय परिचर्चा, सम्मान समारोह एवं भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
साहित्य मनीषियों का सम्मानकार्यक्रम के एक विशेष सत्र में साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और निरंतर ‘साहित्य सृजन’ हेतु छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित विभूतियों को सम्मानित किया गया। कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी एवं मुख्य अतिथि श्री शशांक शर्मा द्वारा निम्नलिखित विद्वानों को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया:
• डॉ. विनय कुमार पाठक (वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग)
• डॉ. अजय पाठक (प्रतिष्ठित साहित्यकार)
• श्री द्वारिका प्रसाद अग्रवाल (वरिष्ठ साहित्य सेवी)
• श्री सतीश जायसवाल (सुप्रसिद्ध कथाकार एवं साहित्यकार)
साहित्य संस्कारों की जननी है: मुख्य अतिथि
मुख्य अतिथि एवं छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य सृजन ही समाज को सही दिशा देता है। उन्होंने विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग की स्थापना को समय की मांग बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने सम्मानित विभूतियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इस आयोजन को विश्वविद्यालय के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बताया।
काव्य रस की वर्षा
कवि सम्मेलन में देश के विख्यात रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया:
• डॉ. विष्णु सक्सेना (गाजियाबाद): “तुम हमारी कसम तोड़ दो, हम तुम्हारी कसम तोड़ दें।”
• डॉ. सोनरूपा विशाल (बदायूँ): “जाने क्यों तुमसे मिलने की आशा कम, विश्वास बहुत ज्यादा है।”
• श्री बलराम श्रीवास्तव (मैनपुरी): ने स्वतंत्रता सेनानी व कवि बलबीर सिंह ‘रंग’ के प्रेरक संस्मरण और कविताएं साझा कीं।
• आचार्य देवेन्द्र देव एवं श्री हिमांशु श्रोत्रिय (बरेली): ने ओजस्वी काव्य पाठ किया।
गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम का सफल संचालन संयोजक श्री यशवंत कुमार पटेल एवं सचिव श्री गौरव साहू ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. तारणिश गौतम, प्रो. एच.एस. होता, डॉ. सुधीर शर्मा, डॉ. अनीता पाण्डेय, डॉ. लतिका ताम्रकार, डॉ. पूजा पाण्डेय, श्री सुमित शर्मा सहित विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षक, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
साहित्य मनीषियों का सम्मानकार्यक्रम के एक विशेष सत्र में साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और निरंतर ‘साहित्य सृजन’ हेतु छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित विभूतियों को सम्मानित किया गया। कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी एवं मुख्य अतिथि श्री शशांक शर्मा द्वारा निम्नलिखित विद्वानों को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया:
• डॉ. विनय कुमार पाठक (वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग)
• डॉ. अजय पाठक (प्रतिष्ठित साहित्यकार)
• श्री द्वारिका प्रसाद अग्रवाल (वरिष्ठ साहित्य सेवी)
• श्री सतीश जायसवाल (सुप्रसिद्ध कथाकार एवं साहित्यकार)
साहित्य संस्कारों की जननी है: मुख्य अतिथि
मुख्य अतिथि एवं छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य सृजन ही समाज को सही दिशा देता है। उन्होंने विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग की स्थापना को समय की मांग बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने सम्मानित विभूतियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इस आयोजन को विश्वविद्यालय के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बताया।
काव्य रस की वर्षा
कवि सम्मेलन में देश के विख्यात रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया:
• डॉ. विष्णु सक्सेना (गाजियाबाद): “तुम हमारी कसम तोड़ दो, हम तुम्हारी कसम तोड़ दें।”
• डॉ. सोनरूपा विशाल (बदायूँ): “जाने क्यों तुमसे मिलने की आशा कम, विश्वास बहुत ज्यादा है।”
• श्री बलराम श्रीवास्तव (मैनपुरी): ने स्वतंत्रता सेनानी व कवि बलबीर सिंह ‘रंग’ के प्रेरक संस्मरण और कविताएं साझा कीं।
• आचार्य देवेन्द्र देव एवं श्री हिमांशु श्रोत्रिय (बरेली): ने ओजस्वी काव्य पाठ किया।
गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम का सफल संचालन संयोजक श्री यशवंत कुमार पटेल एवं सचिव श्री गौरव साहू ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. तारणिश गौतम, प्रो. एच.एस. होता, डॉ. सुधीर शर्मा, डॉ. अनीता पाण्डेय, डॉ. लतिका ताम्रकार, डॉ. पूजा पाण्डेय, श्री सुमित शर्मा सहित विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षक, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।





