CG News: Raipur।छत्तीसगढ़ के सरकारी हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में प्राचार्यों की भूमिका और कार्यप्रणाली को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने एक नई और सख्त गाइडलाइन जारी की है।

इस नए आदेश के तहत अब प्राचार्य केवल विद्यालय के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें जरूरत और तय व्यवस्था के अनुसार प्रतिदिन कम से कम दो कालखंड (पीरियड्स) कक्षाओं में जाकर अध्यापन भी कराना होगा।

शिक्षा विभाग का यह कदम स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा विद्यार्थियों की पढ़ाई में प्राचार्यों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

हालांकि, इस फैसले के सामने आते ही छत्तीसगढ़ प्राचार्य एसोसिएशन ने इसका कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि प्राचार्यों पर पहले से ही विभागीय बैठकों, योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक कार्यों का अत्यधिक दबाव रहता है।

ऐसे में बिना मौजूदा व्यवस्थाओं और कमियों को सुधारे अतिरिक्त अध्यापन की यह जिम्मेदारी सौंपना व्यावहारिक रूप से सही नहीं है।

नई गाइडलाइन के अनुसार संबंधित विद्यालय के प्राचार्य को स्कूल से जुड़े सभी प्रशासनिक और वित्तीय दायित्वों का निर्वहन करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से प्राचार्यों का सीधा जुड़ाव शैक्षणिक गतिविधियों से होगा और वे पढ़ाई की गुणवत्ता पर बेहतर निगरानी रख सकेंगे। इसके साथ ही विभाग ने स्कूल भवन के कमरों के उपयोग को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

आदेश में कहा गया है कि स्कूल के ड्राइंग और डिजाइन के अनुसार प्राचार्य, लिपिक और अन्य कार्यालयीन स्टाफ के लिए जो कक्ष निर्धारित हैं, उन्हें नियमों के तहत उसी रूप में उपयोग किया जाए।

अध्यापन के लिए तय किए गए कमरों में प्राचार्य, लिपिक या अन्य स्टाफ के बैठने की व्यवस्था नहीं की जाएगी और ऐसे सभी कक्षों का उपयोग केवल छात्र-छात्राओं के अध्ययन-अध्यापन के लिए ही होगा।

इसके अलावा विद्यालयों में उपलब्ध बड़े कमरों के उपयोग को लेकर भी स्थिति साफ कर दी गई है। नए निर्देशों के मुताबिक, स्कूलों के बड़े कमरों का इस्तेमाल सिर्फ बच्चों की पढ़ाई के लिए किया जाएगा और इन्हें किसी भी स्थिति में कार्यालयीन कामकाज या स्टाफ के बैठने के लिए उपयोग में नहीं लाया जा सकेगा।

शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य स्कूल भवन में उपलब्ध कक्षों का समुचित और बेहतर इस्तेमाल करना तथा विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त व अनुकूल शैक्षणिक माहौल तैयार करना है।