रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी है। कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने कैशलेस चिकित्सा योजना में OPD (ओपीडी) सुविधा को भी शामिल करने का प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के लिए मुख्य सचिव को भेज दिया है। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से योजना के क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

दरअसल, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की 11 सूत्रीय मांगों में शासकीय सेवकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की मांग भी शामिल है। फेडरेशन ने इस मांग के समर्थन में 29, 30 और 31 दिसंबर को प्रदेशव्यापी बंद का आह्वान किया था। फेडरेशन का कहना है कि लगातार प्रयास और मांग उठाए जाने के बाद अब इस दिशा में सकारात्मक प्रगति हुई है।

फेडरेशन के मुताबिक, उसके प्रस्ताव पर मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक आयोजित कर आवश्यक सुझाव लेने और शासन के दिशा-निर्देश जारी करने से पहले संगठनों से चर्चा करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में मंत्रालय में कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई।

बैठक के दौरान फेडरेशन ने कैशलेस चिकित्सा योजना को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसमें केवल अस्पताल में भर्ती होने वाली चिकित्सा सेवाओं तक सीमित न रखते हुए OPD सुविधा को भी शामिल करने का सुझाव दिया। फेडरेशन का कहना है कि स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने इस सुझाव को प्रस्ताव में शामिल किया है और कैबिनेट की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव मुख्य सचिव को भेजा जा चुका है।

अब इस प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा कैशलेस चिकित्सा सुविधा के संचालन और पात्रता समेत अन्य प्रक्रियाओं को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, फिलहाल योजना को अंतिम रूप से लागू करने के लिए कैबिनेट की मंजूरी और उसके बाद विभागीय आदेश जारी होना बाकी है।

फेडरेशन ने इसे कर्मचारियों और अधिकारियों की चिकित्सा सुविधाओं से जुड़ी अपनी मांग की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति बताया है। वहीं, योजना वास्तव में कब से लागू होगी और इसमें किन-किन चिकित्सा सेवाओं, अस्पतालों तथा कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा, इसकी स्थिति शासन के अंतिम निर्णय और स्वास्थ्य विभाग के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होगी