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CBSE का बोर्ड, CG की परीक्षा: बिलासपुर से संसद तक गूंजा ‘फर्जी एजुकेशन मॉडल’, जांच की घेराबंदी तेज

नारायण समेत स्कूलों पर बिना मान्यता एडमिशन और वसूली के आरोप—सांसद ज्योत्सना महंत ने उठाया मुद्दा, केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने भी दिए जांच के निर्देश

बिलासपुर..शिक्षा के नाम पर भरोसे के साथ खिलवाड़ का मामला अब स्थानीय दायरे से निकलकर संसद तक पहुंच गया है। सीजी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों द्वारा CBSE के नाम पर पढ़ाई कराने और अंत में CG बोर्ड की परीक्षा में बैठाने के कथित फर्जीवाड़े ने बड़ा सियासी और प्रशासनिक मुद्दा खड़ा कर दिया है।

लोकसभा में उठा बिलासपुर मॉडल का मामला

कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत ने इस पूरे प्रकरण को लोकसभा में उठाते हुए भारत सरकार से उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर जांच की मांग की है। यह मामला अब केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं रहा—बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन गया है।

केंद्रीय मंत्री का भी सख्त रुख

इससे पहले, छत्तीसगढ़ से केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर हाई पावर कमेटी से जांच के निर्देश दिए थे। यानि राज्य और केंद्र—दोनों स्तर पर इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है।

नारायण टेक्नोक्रेट पर सबसे ज्यादा आरोप

बिलासपुर के नारायण टेक्नोक्रेट और दो अन्य स्कूलों पर आरोप है कि उन्होंने पूरे साल CBSE पैटर्न से पढ़ाई कराई, लेकिन परीक्षा CG बोर्ड से दिलवाई। इस कथित दोहरी व्यवस्था ने अभिभावकों और छात्रों को सीधे नुकसान में डाल दिया।

बिना मान्यता एडमिशन, फिर मोटी वसूली

सबसे गंभीर आरोप यह है कि स्कूल प्रबंधन ने CBSE मान्यता के बिना ही एडमिशन लिए और ब्रांड का नाम इस्तेमाल कर अभिभावकों से भारी फीस वसूली।
हाल ही में प्रबंधन ने खुद स्वीकार किया कि मान्यता एक सत्र के बाद मिली, जिससे पूरे सत्र की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अभिभावकों का आरोप—“विश्वास के नाम पर ठगी”

नाराज अभिभावकों का कहना है कि उन्हें अंधेरे में रखकर लाखों रुपये वसूले गए। मामले में दस्तावेजी हेरफेर और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका भी जताई जा रही है।

420 की आहट, विभाग की चुप्पी सवालों में

अगर आरोप साबित होते हैं तो प्रबंधन पर IPC 420 (धोखाधड़ी) के तहत कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल शिक्षा विभाग की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है—जिससे जांच की मांग और तेज हो गई है।

मामला अब सिर्फ स्कूल का नहीं

यह पूरा विवाद अब एक बड़े सवाल में बदल गया है—
क्या शिक्षा अब ब्रांड और बोर्ड के नाम पर ‘बिजनेस मॉडल’ बनती जा रही है? आने वाले दिनों में जांच की दिशा तय करेगी कि यह मामला केवल कुछ स्कूलों तक सीमित रहेगा या पूरी व्यवस्था की परतें खुलेंगी।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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