Advocate FIR Bribe Deal- एफआईआर से नाम हटाने के बदले 5 लाख की घूस मांगने वाला हेड कॉन्स्टेबल और बिचौलिया वकील नपे, एसीबी की बड़ी कार्रवाई
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की ओर से जयपुर के एक पुलिस स्टेशन में तैनात हेड कॉन्स्टेबल व एडवोकेट के खिलाफ बुधवार को मामला दर्ज किया गया। हेड कॉन्स्टेबल ने 5 लाख रुपए घूस मांगी थी। वहीं एडवोकेट ने 25 हजार रुपए में डील तय करवाई थी। मामला एक व्यापारी, उसके भाई और व्यापारी के ट्रक ड्राइवर के खिलाफ दर्ज FIR में से नाम हटाने का है। एफआईआर में से नाम हटाने के बाद चार्जशीट पेश करवाने के बदले रिश्वत मांगी गई थी।

Advocate FIR Bribe Deal/जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने खाकी और काले कोट के गठजोड़ का पर्दाफाश करते हुए एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जयपुर के विधायकपुरी थाने में तैनात एक हेड कॉन्स्टेबल और एक वकील के खिलाफ रिश्वत मांगने के आरोप में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया है।
Advocate FIR Bribe Deal/आरोप है कि हेड कॉन्स्टेबल ने एक व्यापारी और उसके भाई का नाम एफआईआर से हटाने के बदले 5 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगी थी, जिसमें एक वकील बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था। अंततः यह सौदा 25 हजार रुपये में तय हुआ था, लेकिन इससे पहले कि वे अपने मंसूबों में कामयाब होते, एसीबी ने शिकंजा कस दिया।
Advocate FIR Bribe Deal/इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत हरियाणा के चरखी दादरी निवासी एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की शिकायत से हुई। व्यवसायी का एक ट्रक पुणे से फरीदाबाद के लिए कबाड़ लेकर जा रहा था, जिसे 28 अगस्त 2025 को विधायकपुरी थाना पुलिस ने ड्राइवर के नशे में होने के कारण जब्त कर लिया था।
Advocate FIR Bribe Deal/व्यवसायी को जब काफी दिनों तक ट्रक की लोकेशन नहीं मिली, तो वह जयपुर पहुंचा और अनजाने में जब्त ट्रक से माल निकालकर रवाना कर दिया। इस पर पुलिस ने सरकारी कार्रवाई में बाधा डालने और बिना सूचना ट्रक ले जाने के आरोप में व्यवसायी, उसके भाई और ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।
हालांकि बाद में दोनों को जमानत मिल गई और कोर्ट से ट्रक भी छूट गया, लेकिन पुलिस ने व्यवसायी के भाई को गिरफ्तार करने की धमकी देना शुरू कर दिया।
इसी मामले को खत्म करने और चार्जशीट पेश करने के बदले जांच अधिकारी हेड कॉन्स्टेबल राजकरण ने 5 लाख रुपये की मांग रखी। व्यवसायी और ड्राइवर की जमानत कराने वाले वकील सनातन सोनी ने इस डील में मध्यस्थता की। जब व्यवसायी ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो मोलभाव का दौर शुरू हुआ।
पहले मांग घटकर 1 लाख रुपये हुई और आखिर में मामला 30 हजार रुपये पर आकर टिका। एडवोकेट के माध्यम से हेड कॉन्स्टेबल से फोन पर हुई बातचीत के बाद सौदा 25 हजार रुपये में फाइनल हुआ। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि पैसे मिलते ही भाई का नाम केस से हटा दिया जाएगा।
व्यवसायी ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया और एसीबी में शिकायत दर्ज कराई। एसीबी ने जब इस शिकायत का गोपनीय सत्यापन किया, तो हेड कॉन्स्टेबल राजकरण और वकील सनातन सोनी द्वारा रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हो गई। जांच में पाया गया कि आरोपी पद का दुरुपयोग कर अवैध वसूली की कोशिश कर रहे थे। बुधवार को एसीबी ने 54 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल राजकरण (निवासी महेंद्रगढ़, हरियाणा) और 45 वर्षीय वकील सनातन सोनी (निवासी श्रीमाधोपुर, सीकर) के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली।




