महापौर के वार्ड में पानी पर ‘सांप्रदायिक’ विवाद! मुस्लिम परिवारों का आरोप—हिंदू लोग पानी नहीं लेने दे रहे
प्रधानमंत्री आवास में पानी को लेकर फूटा गुस्सा: “महापौर नहीं सुनती, निगम सफाई तक नहीं करता

बिलासपुर… बंधवापारा स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना परिसर में पानी को लेकर विवाद अब गंभीर सामाजिक तनाव का रूप लेने लगा है। आवास में रहने वाली मुस्लिम महिलाओं और परिवारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पीने का पानी भरने से रोका जा रहा है। लगातार हो रहे विवाद और अनदेखी से नाराज रहवासी गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
रहवासियों ने आरोप लगाया कि नए प्रधानमंत्री आवास में रहने वाले लोग महीनों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। पुराने आवास में रहने वाले कुछ लोग पानी देने में भेदभाव कर रहे हैं, जिसके कारण आए दिन झगड़े और विवाद की स्थिति बन रही है। महिलाओं ने कहा कि कई बार अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ता है और पीने के पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में रहवासियों ने साफ कहा कि वे नल कनेक्शन, बोर सुविधा, परिसर की घेराबंदी और नियमित साफ-सफाई की मांग को लेकर लगातार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रहे हैं। उनका आरोप है कि जोन कार्यालय तोरवा, स्थानीय पार्षद और महापौर से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम की ओर से परिसर में नियमित सफाई तक नहीं कराई जाती। गंदगी और पानी संकट के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार ने मकान तो दे दिया, लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने से उनका जीवन नारकीय बन गया है।
मामले पर प्रदेश कांग्रेस पदाधिकारी महेश दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि पानी जैसी मूलभूत सुविधा को लेकर धर्म और समुदाय के आधार पर भेदभाव हो रहा है तो यह बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर की पहचान हमेशा सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की रही है, लेकिन अब माहौल को दूषित करने की कोशिशें दिख रही हैं।
महेश दुबे ने कहा कि शासन-प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच करानी चाहिए और यदि किसी स्तर पर भेदभाव या लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने शहर के सभी समाज वर्गों से भी अपील की कि जाति-धर्म के नाम पर लोगों को बांटने वाली मानसिकता के खिलाफ खुलकर सामने आएं।





