कलेक्टर की कड़ी फटकार के बाद जागा शिक्षा विभाग—अब आदेश जमीन पर उतरेंगे या फिर फाइलों में दबेंगे?”
निजी स्कूलों की वसूली पर सख्ती के निर्देश, लेकिन निगरानी और अमल पर सवाल बरकरार

बिलासपुर..कलेक्टर की कड़ी फटकार के बाद जिला शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं। विभाग ने फीस, किताब और यूनिफॉर्म के नाम पर हो रही वसूली पर नियंत्रण और नियमों के पालन को लेकर निर्देश दिए हैं। हालांकि, इन आदेशों के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है और ज़मीनी स्तर पर इनके असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
निजी स्कूलों में किताबों, यूनिफॉर्म और फीस के नाम पर अभिभावकों से अतिरिक्त वसूली लंबे समय से जारी है। हर शैक्षणिक सत्र में तय दुकानों से सामग्री खरीदने का दबाव और अतिरिक्त शुल्क की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद अब तक इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं दिखा, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि लगातार शिकायतों के बावजूद जिला शिक्षा विभाग ने समय पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की।
विभाग द्वारा जारी आदेशों में सख्ती दिखाई गई है, लेकिन निगरानी और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था के अभाव में इनके प्रभाव को लेकर संशय बना हुआ है। यदि निरीक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित रहता है, तो स्कूल प्रबंधन पहले से ही व्यवस्था को प्रभावित करने के तरीके तलाश लेते हैं। वहीं, निरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने पर इसकी प्रभावशीलता पर भी सवाल उठते हैं।
मौजूदा हालात में अभिभावकों को किसी ठोस राहत के संकेत नहीं मिल रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था में भी कोई स्पष्ट सुधार दिखाई नहीं देता। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि केवल आदेश जारी करने के बजाय उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाए। हेल्पलाइन, नियमित और पारदर्शी निरीक्षण तथा शिकायतों के समयबद्ध निराकरण जैसी व्यवस्थाओं को लागू करना आवश्यक माना जा रहा है।
पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी और उनके अमले की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई का अभाव विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर संदेह पैदा करता है। अब नजर इस बात पर है कि कलेक्टर की सख्ती के बाद जारी किए गए आदेशों का असर ज़मीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है और क्या इससे निजी स्कूलों की मनमानी पर वास्तव में नियंत्रण स्थापित हो पाता है।





