मकान शून्य, भुगतान पूर्ण — रतनपुर नगर पालिका में पीएम आवास घोटाला..?
बिना ईंट-सीमेंट के निकल गई पूरी सरकारी राशि, पीएम आवास योजना पर सवाल

बिलासपुर…प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के क्रियान्वयन को लेकर रतनपुर नगर पालिका परिषद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। वार्ड क्रमांक–02, गांधी नगर में स्वीकृत एक आवास के मामले में आरोप है कि पूरी सरकारी राशि आहरित कर ली गई, जबकि जमीनी स्तर पर आज तक निर्माण शुरू तक नहीं हुआ। मामला सामने आते ही नगर क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार गांधी नगर निवासी गीता बाई, पति रामशरण निर्मलकर के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था। योजना के दिशा-निर्देशों के मुताबिक राशि चरणबद्ध रूप से जारी होती है और हर किस्त से पहले निर्माण की भौतिक जांच अनिवार्य होती है। लेकिन इस प्रकरण में आरोप है कि इन सभी प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए कागजों में निर्माण पूर्ण दर्शाकर पूरी राशि निकाल ली गई।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बताए गए स्थल पर न तो नींव है, न दीवार और न ही निर्माण से जुड़ा कोई साक्ष्य। इसके बावजूद फाइलों में आवास को पूर्ण दिखाया गया, जो सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका को जन्म देता है।
मामले को लेकर प्रदीप सिंह ठाकुर ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद रतनपुर को लिखित शिकायत सौंपते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि हितग्राही, संबंधित ठेकेदार और नगर पालिका स्तर के जिम्मेदारों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राशि आहरण किया गया।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि जांच में दोष सिद्ध होता है तो संबंधित ठेकेदार, अधिकारी-कर्मचारियों और हितग्राही पर कड़ी विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ शासन की राशि की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।
मामला उजागर होने के बाद नगर में यह सवाल गूंजने लगे हैं कि बिना मौके के निरीक्षण और भौतिक सत्यापन के भुगतान कैसे स्वीकृत हो गया। साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं ऐसे और मामलों में भी इसी तरह की अनियमितताएं तो नहीं हुई हैं।
फिलहाल इस पूरे प्रकरण पर नगर पालिका प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रतनपुर नगर पालिका इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाती है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यदि आरोप सही पाए गए, तो यह मामला न केवल योजना की विश्वसनीयता बल्कि स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा।





