CG Employees Strike-छत्तीसगढ़ में कलम बंद हड़ताल,लाखों कर्मचारी तीन दिन की हड़ताल पर, मोदी की गारंटी को लेकर सरकार से आर-पार
इस आंदोलन की मुख्य जड़ विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा द्वारा किए गए ‘मोदी की गारंटी’ के वे वादे हैं, जिन्हें कर्मचारी संगठन अब तक अधूरा मान रहे हैं। फेडरेशन का आरोप है कि सरकार ने सत्ता में आने के बाद कर्मचारियों के हितों को नजरअंदाज किया है, जिससे प्रदेशभर के सरकारी सेवकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

CG Employees Strike/कोंडागांव/छत्तीसगढ़ में साल के अंतिम दिनों में सरकारी कामकाज पर पूरी तरह से ब्रेक लगने जा रहा है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर प्रदेशभर के लगभग पांच लाख शासकीय सेवक आज यानी 29 दिसंबर से 31 दिसंबर तक तीन दिवसीय निश्चितकालीन आंदोलन पर उतर आए हैं।
CG Employees Strike/इस महाआंदोलन के चलते प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और अस्पतालों में ताला लटकने की स्थिति बन गई है। फेडरेशन से जुड़े 120 संगठनों ने सामूहिक रूप से अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनके वादे पूरे नहीं किए गए, तो यह आंदोलन भविष्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल का रूप ले लेगा।
CG Employees Strike/राज्यभर के जिला मुख्यालयों में आज सुबह से ही भारी गहमागहमी देखी जा रही है और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं।
CG Employees Strike/इस आंदोलन की मुख्य जड़ विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा द्वारा किए गए ‘मोदी की गारंटी’ के वे वादे हैं, जिन्हें कर्मचारी संगठन अब तक अधूरा मान रहे हैं। फेडरेशन का आरोप है कि सरकार ने सत्ता में आने के बाद कर्मचारियों के हितों को नजरअंदाज किया है, जिससे प्रदेशभर के सरकारी सेवकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
इसी कड़ी में कोंडागांव जिले में भी आंदोलन का व्यापक असर देखा जा रहा है। जिला संयोजक शिवराज ठाकुर और सहसंयोजक निर्मल शार्दुल के नेतृत्व में शहर के चौपाटी मैदान में हजारों कर्मचारी तीन दिनों तक विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे। कोंडागांव के 33 सक्रिय संगठनों ने इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए कमर कस ली है और विभागवार आवेदन भरवाकर शत-प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित की है।
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की 11 सूत्रीय मांगों की सूची काफी लंबी है, जिसमें केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत प्रदान करना सबसे प्रमुख है।
इसके अलावा, कर्मचारी 2019 से लंबित डीए एरियर्स का भुगतान, विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए गठित पिगुआ कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और 8, 16, 24 व 32 वर्ष की सेवा पर चार स्तरीय समयमान वेतनमान लागू करने की मांग कर रहे हैं।
अन्य महत्वपूर्ण मांगों में कैशलेस चिकित्सा सुविधा, नगरीय निकाय कर्मचारियों का नियमित वेतन, अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में ढील, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण और सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 65 वर्ष करना शामिल है। साथ ही, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी इस बार प्रमुखता से उठाया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर यह आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। फेडरेशन के नेताओं का कहना है कि वे पहले भी 16 जुलाई और 22 अगस्त 2025 को कलेक्टरों के माध्यम से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन शासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
इसी उपेक्षा के कारण अब कर्मचारियों ने काम बंद कर हड़ताल पर जाने का कड़ा फैसला लिया है। कोंडागांव सहित पूरे प्रदेश में स्कूलों की छुट्टी और अस्पतालों में सामान्य सेवाओं के प्रभावित होने से आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
कर्मचारी संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी जायज मांगों के लिए अब झुकने वाले नहीं हैं और इस तीन दिवसीय शक्ति प्रदर्शन के बाद यदि समाधान नहीं निकला, तो पूरे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को ठप करने वाली अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।





