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सरकारी जमीन को ‘जायदाद’ समझ बैठा जगन्नाथ मंगलम! तीन नोटिस बेअसर —सीमांकन के बाद गिरेगी कार्रवाई की गाज

बिलासपुर… शिव टाकीज़ चौक और पुराने बसस्टैंड के बीच की कीमती सरकारी भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जे की कहानी आखिरकार खुलकर सामने आ गई है। जगन्नाथ मंगलम के संचालक पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी भूमि पर न केवल अवैध निर्माण किया, बल्कि किचन तक बना लिया और नगर निगम के तीन नोटिस भेजने पर भी चुप्पी साधे रखी। जहां 40 फीट चौड़ी सड़क होनी चाहिए थी, वहीं लगभग आधा हिस्सा काटकर कब्जा कर लिया गया। लगातार शिकायतों के बावजूद संचालक की अनदेखी प्रशासन को खुली चुनौती की तरह दिखी।

राजनीतिक संरक्षण की चर्चा.. कार्रवाई रुकी क्यों?

जुना बिलासपुर के वार्ड-33 में स्थित यह भूमि लंबे समय से विवादित रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीतिक संरक्षण और प्रभाव के चलते कई बार कार्रवाई की फाइलें आगे बढ़ने से रोक दी गईं। नगर निगम ने साफ किया है कि संचालक को दस्तावेज लाने के लिए निर्देशित किया गया था, लेकिन न वे खुद सामने आए, न ही कोई रिकॉर्ड। शहर के महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र में अवैध निर्माण का लगातार बढ़ना प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

निगम की चेतावनी— अब गिरेगी कार्रवाई की गाज

निगम के भवन अधिकारी अनुपम तिवारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर निर्माण की शिकायत पर तीन नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन जब संचालक ने कोई जवाब नहीं दिया तो सीमांकन का पत्र जारी करना पड़ा। उन्होंने कहा कि सीमांकन के बाद निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह संकेत है कि इस बार प्रशासन अवैध कब्जाधारियों के लिए कोई ढील नहीं छोड़ने वाला।

सीमांकन होगा निर्णायक मोड़.. सच आएगा सामने

सीमांकन से यह स्पष्ट होगा कि कितनी जमीन सरकारी थी, कितनी पर अवैध कब्जा किया गया और किस हिस्से पर निर्माण पूरी तरह गैरकानूनी है। निगम सूत्रों के अनुसार सीमांकन पूरा होते ही अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के की जाएगी। यह कदम मामले का टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है।

सबसे बड़ा सवाल— अवैध कब्जे फलते कैसे हैं?

यह मुद्दा सिर्फ एक संचालक का नहीं है, बल्कि शहर में बढ़ते अवैध कब्जों की मानसिकता और प्रशासनिक ढील के खिलाफ बड़ा सवाल है। जब कोई संचालक सरकारी जमीन पर किचन बना ले और तीन नोटिसों को कूड़ेदान में डाल दे, तो यह अवैध कब्जा ही नहीं—प्रशासन की साख पर भी सीधे चोट है। अब शहर की निगाहें इस कार्रवाई पर हैं कि क्या यह मामला उदाहरण बनेगा या फिर पुराने ढर्रे की तरह फाइलों में धूल फांकता रह जाएगा।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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