1478 शिक्षकों की रुकी हुई घड़ी चलने को तैयार.. हाई कोर्ट का फैसला सुरक्षित… मुहर का इंतजार”

बिलासपुर, 5 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े हजारों शिक्षकों के लिए राहतभरी खबर है। प्राचार्य पदोन्नति से जुड़ी याचिका पर मंगलवार को हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिससे राज्य के ई संवर्ग के 1478 शिक्षकों को प्राचार्य बनने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
यह मामला सेवानिवृत्त शिक्षक प्रकाश नारायण तिवारी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने प्राचार्य पदों पर 100 प्रतिशत पदों पर ई संवर्ग के शिक्षकों की पदोन्नति की मांग की थी, जबकि वर्तमान में शासन 65 प्रतिशत पद ई संवर्ग, 25 प्रतिशत लोकल बॉडी (एलबी), और 10 प्रतिशत सीधी भर्ती से भरता है।
इससे पहले हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 17 जून को अपना फैसला सुनाते हुए याचिकाओं को खारिज कर दिया था और शासन द्वारा निर्धारित नियमों को उचित बताया था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि प्राचार्य पद प्रशासनिक होता है, शैक्षणिक नहीं, इसलिए बीएड की योग्यता आवश्यक नहीं मानी गई।
हालांकि, न्यायिक प्रक्रिया के कारण प्रदेश में एक दशक से प्राचार्य पदोन्नति रुकी हुई थी, जिससे 3290 स्कूल बिना प्राचार्य के संचालन की स्थिति में हैं। राज्य में स्वीकृत 4783 प्राचार्य पदों में से लगभग 75 प्रतिशत पद खाली हैं। अप्रैल में शिक्षा विभाग ने 2813 शिक्षकों की पदोन्नति सूची जारी की थी, जिसमें 1478 ई संवर्ग और 1335 टी संवर्ग के शिक्षक शामिल थे, लेकिन उस पर 1 मई को कोर्ट ने स्थगन आदेश दे दिया था।
अब हाई कोर्ट के इस फैसले के सुरक्षित रखे जाने से उम्मीद जगी है कि जल्द ही पदोन्नति प्रक्रिया को हरी झंडी मिल सकती है। शिक्षा विभाग और हजारों शिक्षकों की नजरें अब कोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी हैं।





