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CG NEWS: D. E. O. के तबादले पर शिक्षकों ने क्यों फोड़े पटाखे और बांटी मिठाइयां …?

CG NEWS : सूरजपुर (मनीष जायसवाल)।जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर रही भारती वर्मा जिनका मूल पद प्राचार्य है, उनका तबादला राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा रायपुर में सहायक संचालक के पद पर हो गया है। यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है। लेकिन उनके ही अधीनस्थ कर्मचारियों ने पटाखे फोड़े और  एक दूसरे का मुंह मीठा करके भारती वर्मा के कार्यकाल के कड़वे अनुभव को भुलाने का प्रयास किया है। ये महज आम घटना नहीं बल्कि व्यवस्था में बैठे जिम्मेदार पद के अधिकारी के तानाशाही को करारा तमाचा है..! उनके मनमाने, भ्रष्ट और जुल्मी रवैये से तंग आए शिक्षकों ने उनके तबादले को अपनी बगावत की बुलंद जीत माना हैं ..!

सूरजपुर जिला शिक्षा अधिकारी रही भारती वर्मा के तबादले पर जश्न मना रहे शिक्षक साझा मंच के जिला संचालक सचिन त्रिपाठी और यादवेन्द्र दुबे ने बताया कि श्रीमती वर्मा के तानाशाही रवैये और मनमाने आदेशों से पूरा शिक्षा तंत्र त्रस्त था..। हाल ही में हुए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में भारती वर्मा के मार्गदर्शन में जिस तरह की भ्रष्टाचार और‌ अनियमितताओं का बोल बाला रहा उसने शिक्षकों का धैर्य तोड़ दिया..। शिक्षकों पर नियम विरुद्ध दबाव बनाया गया, भयादोहन किया गया और विरोध करने वालों को निलंबन जैसे तानाशाही हथकंडों का शिकार होना पड़ा।
साझा मंच के जिला संचालकों का कहना है कि उनका एक शिक्षक से लेकर प्राचार्य
बनने का अनुभव कम नहीं होता है। इस दौरान सहनशीलता और नेतृत्व क्षमता के गुण विकसित हो जाते हैं।  लेकिन उनके एक बड़े जिम्मेदार पद में बैठने के बाद उनकी  कार्यशैली तानाशाह की रही है। इसलिए उन्हें हटाने के लिए मुखर होकर आंदोलन भी  करना पड़ा।

मंच की ओर से बताया गया कि सूरजपुर जिले के‌ इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि शिक्षकों ने अपने किसी वरिष्ठ अधिकारी के विरूद्ध खुलकर विरोध प्रदर्शन किया।

शिक्षक नेताओं का कहना है कि श्रीमती वर्मा के व्यवहार से केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि उनके अपने कार्यालयीन कर्मचारी, बीईओ, मीडिया प्रतिनिधि और यहां तक कि जनप्रतिनिधि भी परेशान थे..!
डीईओ के तबादले की खबर मिलते ही जिले के शिक्षकों ने सार्वजनिक रूप से जश्न मनाया और प्रदेश की मंत्री, विधायक, भाजपा जिलाध्यक्ष मुरली सोनी और जिले के पत्रकार साथियों का विशेष आभार जताया कि उन्होंने शिक्षकों की आवाज़ को उच्च स्तर तक पहुंचाया, जिसके परिणाम स्वरूप सूरजपुर के शिक्षा विभाग को  भारती वर्मा के तानाशाही से मुक्ति मिली।
इस जश्न में सहादत अली, राकेश शुक्ला, गौतम शर्मा, संजय यादव, कृष्णा सोनी, भुनेश्वर सिंह, राकेश गौतम, कमल किशोर पाण्डेय, राधेश्याम साहू, मुन्ना प्रसाद सोनी, पिंकू शर्मा, विजेन्द्र जायसवाल, संतोष गुप्ता, रजनीश तिवारी, आशीष जायसवाल, अंकित कोसरिया, जोगेन्द्र भास्कर और दिनेश साहू जैसे शिक्षक प्रमुख रूप से शामिल रहे।
लेकिन यह तबादला सवालों का तूफान खड़ा करता है। कांग्रेस शासन में जांजगीर-चांपा से आठ महीने में और अब भाजपा सरकार में सूरजपुर से छह महीने में भारती वर्मा की ऐसी विदाई सामान्य प्रशासनिक कदम नहीं लगती। उनके बार-बार विवादित और छोटे कार्यकाल प्रशासनिक नाकामी की चुगली करते हैं…। ऐसे अधिकारी को समग्र शिक्षा में उपसंचालक जैसे संवेदनशील पद पर बिठाना घोर लापरवाही नहीं तो और क्या है..? शिक्षकों का पटाखे फोड़ना और मिठाइयां बांटना कोई मामूली घटना नही यह उनके अत्याचारों, भ्रष्टाचार और कुशासन से उपजे गहरे आक्रोश का विस्फोट है..। यह घटना प्रशासनिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और योग्यता की कमी को बेनकाब करती है..। आखिर कब तक ऐसी नियुक्तियां शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करती रहेंगी…?

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