लखनऊ। सीबीआई कोर्ट (पश्चिम), लखनऊ ने शनिवार को सीआरपीएफ के तत्कालीन उप महानिरीक्षक (डीआईजी) विनोद कुमार शर्मा और सीआरपीएफ के दो अन्य कर्मियों सत्यवीर सिंह और तीरथ पाल चतुर्वेदी को तीन साल के कठोर कारावास और कुल 1.2 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने यह फैसला केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) में कांस्टेबलों की भर्ती से संबंधित भ्रष्टाचार मामले में दिया है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर विनोद कुमार शर्मा और अन्य के खिलाफ 23 फरवरी, 2009 को यह मामला दर्ज किया। जांच में पता चला कि उसने सीआरपीएफ में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) के पद पर भर्ती होने के इच्छुक उम्मीदवारों से रिश्वत लेने के लिए निजी व्यक्तियों के साथ आपराधिक साजिश रची थी।

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आरोपी विनोद कुमार शर्मा ने भर्ती कार्यक्रम और उपलब्ध रिक्तियों के बारे में अग्रिम जानकारी बिचौलियों को प्रदान की थी, जो बाद में संभावित उम्मीदवारों को गारंटीकृत चयन के बदले में भारी रिश्वत देने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

जांच पूरी होने पर सीबीआई ने 23 नवंबर 2010 और 16 जुलाई 2012 को आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए। पूर्ण सुनवाई के बाद न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया और तदनुसार सजा सुनाई।

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इससे पहले शुक्रवार को चेन्नई की सीबीआई अदालत ने पूर्व वरिष्ठ कर सहायक बाबू प्रसाद कुमार और छह अन्य निजी व्यक्तियों बी प्रवीण कुमार, ट्रेवेलिन मैरियन कॉर्नील, पी स्टीफन, ए गोपिकृष्णा, वेंकटेश और सी गुनेसेलन को इनकम टैक्स रिफंड धोखाधड़ी मामले में दोषी ठहराया।

अदालत ने सभी को चार साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई और कुल 2.4 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। यह मामला 31 दिसंबर 2019 को सीबीआई में दर्ज किया गया था। शिकायत चेन्नई के सहायक आयुक्त इनकम टैक्स की ओर से आई थी।

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आरोप है कि अभियुक्तों ने फर्जी दस्तावेज और नकली पहचान का उपयोग करके 4 जून 2015 से 31 अगस्त 2019 के बीच इनकम टैक्स रिफंड जारी किए, जिससे आयकर विभाग को लगभग 2.38 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

जांच में सामने आया कि बाबू प्रसाद कुमार ने इस धोखाधड़ी में प्रमुख भूमिका निभाई और अवैध राशि को परिवार और सहयोगियों के जरिए छुपाने का प्रयास किया।

जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 1 मार्च 2021 को सभी सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। ट्रायल के बाद अदालत ने सभी को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।