संवेदनहीनता की पराकाष्ठा: हाईकोर्ट के पास मृत गाय को ऑटो से घसीटा, सिस्टम और ‘गौ-रक्षक’ दोनों कठघरे में
दिनदहाड़े किलोमीटर तक घसीटी गई मृत गाय, भीड़ तमाशबीन रही और व्यवस्था मौन

बिलासपुर… दोपहर ठीक 12 बजे। नेशनल हाईवे 130 बोदरी नगर पंचायत और, तिफरा क्षेत्र के बीच सड़क पर सामान्य आवाजाही चल रही थी—कोई अदालत जा रहा था, कोई दफ्तर। इसी बीच एक ऑटो के पीछे रस्सी से बंधी मृत गाय को घसीटते हुए ले जाया जा रहा था। जिसने भी देखा, सन्न रह गया।
घटना स्थल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से कुछ ही दूरी पर है। शहर और जिले में गौ-रक्षा के नाम पर सक्रिय समूहों की लंबी सूची है, लेकिन उस वक्त सड़क पर एक भी हाथ आगे नहीं बढ़ा। लोग रुकते रहे, देखते रहे, फिर कुछ युवकों ने ऑटो को रोककर चालक को फटकार लगाई। तब जाकर रस्सी खोली गई।
पूछताछ में चालक ने अपना नाम वीर यादव बताया। वह बोदरी का रहने वाला है। उसके मुताबिक पास कॉलोनी रामा वैली के बगल से स्थित पेट्रोल पंप के सामने गाय मृत पड़ी थी। वह कैसे मरी इसकी जानकारी उसे नहीं है। उसे हटाने के लिए कहा गया, लेकिन कोई उसे हाथ लगाने को तैयार नहीं हुआ। ऑटो पर चढ़ाने की कोशिश की, पर असफल रहा। इसके बाद पेट्रोल पंप संचालक प्रबंधक के आदेश पर मृत गाय के गर्दन में रस्सी बांधकर ऑटो से जोड़ दिया और घसीटते हुए जंगल की ओर फेंकने जा रहा है।
चालक ने यह भी कहा कि वह यादव है उसे मालूम है कि गाय का क्या महत्व है। “मुझे पता है गाय माता है, ऐसा नहीं करना चाहिए, पर कोई उठाने नहीं आया।” क्या इसके बदले उसे पैसे दिए गए? उसने साफ जवाब कुछ भी नहीं दिया।
सवाल यहीं से शुरू होता है।
सड़क दुर्घटनाओं में आवारा मवेशियों की भूमिका को लेकर अदालतें कई बार सरकार और प्रशासन को कठोर टिप्पणियां कर चुकी हैं। प्रदेश में गौ सेवा आयोग का गठन भी हुआ है। गायों के संरक्षण को लेकर समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। फिर हाईवे पर मृत गाय को इस तरह घसीटने की नौबत क्यों आई?
यह दृश्य केवल एक व्यक्ति की असंवेदनशीलता नहीं, व्यवस्था की चूक भी उजागर करता है। यदि पशु प्रबंधन की ठोस व्यवस्था होती, यदि सिस्टम के पास तत्काल निस्तारण की टीम सक्रिय रहती, तो क्या यह मंजर बनता?
सबसे कड़वा सवाल उन आवाज़ों पर है जो छोटी-छोटी घटनाओं पर सड़कों पर उतर आती हैं। यहां, खुले हाईवे पर, दिनदहाड़े एक मृत गाय को घसीटा जाता रहा—और इंसानियत का खून होता रहाव कथित पहरेदार नदारद रहे।
लोगों की मांग साफ है—जीवित अवस्था में संरक्षण और मृत्यु के बाद सम्मान, दोनों की व्यवस्था सुनिश्चित हो। आस्था और कानून, दोनों की परीक्षा ऐसे ही क्षणों में होती है।





