“पट्टा भी तैयार, योजना भी नहीं—फिर क्यों उजड़ें घर?” लिंगियाडीह में 97 दिन के आंदोलन के बीच निगम से निर्णायक टकराव
निगम कमिश्नर कार्यालय स्थित सभागार में हुई गरम बैठक, आश्वासन पर अड़ा प्रतिनिधिमंडल

बिलासपुर…लिंगियाडीह, दुर्गा नगर वार्ड क्रमांक 52 की जमीन को लेकर चल रहा 97 दिनों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर है। ताज़ा बैठक निगम कमिश्नर कार्यालय स्थित सभागार में हुई, जहां विस्थापित और प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से सीधे सवाल किए।
बैठक में पार्षद दिलीप पाटिल, कांग्रेस नेता प्रमोद नायक, कांग्रेस नेता अंकित गौराहा, जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष भारत कश्यप, रामा बघेल,सुनील सोनकर, जितेंद्र पांडे सहित अन्य पदाधिकारी और प्रभावित परिवार मौजूद रहे।
बैठक की शुरुआत से ही माहौल तीखा रहा। प्रमोद गायक दिलीप पाटिल और अंकित गौरहारी इस दौरान निगम प्रशासन का जमकर घेराव किया। प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे से स्पष्ट पूछा—जब सड़क चौड़ीकरण और नाली निर्माण के लिए पर्याप्त जमीन मिल चुकी है और 24 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क का निर्माण अपोलो क्षेत्र की ओर हो रहा है, तब शेष परिवारों को क्यों हटाया जा रहा है?
कमिश्नर ने स्वीकार किया कि अतिक्रमण हटाने के बाद उस भूमि पर फिलहाल कोई ठोस विकास योजना तय नहीं है। भविष्य की संभावित जरूरतों का हवाला दिया गया, लेकिन वर्तमान में कोई स्पष्ट खाका प्रस्तुत नहीं किया गया। यही बिंदु बहस का केंद्र बना।
क्षेत्र में फैल रही चर्चाओं—कि खाली कराई जा रही जमीन पर मॉल या गार्डन जैसी योजना लाई जा सकती है—को लेकर भी सवाल उठा। कमिश्नर ने इसे अफवाह बताया, लेकिन प्रतिनिधिमंडल ने दो टूक कहा कि यदि वर्तमान में कोई योजना नहीं है, तो पीढ़ियों से बसे परिवारों को हटाने की जल्दबाज़ी क्यों?
बैठक के दौरान यह भी सामने आया कि प्रशासन नहीं चाहता कि आंदोलन 100 दिन तक पहुंचे। इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया आई। प्रमोद नायक ने कहा कि आंदोलन कोई संख्या का खेल नहीं, बल्कि अधिकार की लड़ाई है। अंकित गौराहा ने सवाल रखा कि जब पात्र हितग्राहियों से शुल्क लिया जा चुका है और पट्टा तैयार है, तो वितरण में देरी किसके निर्देश पर हो रही है? दिलीप पाटिल ने स्पष्ट कहा कि यदि प्रशासन लिखित आश्वासन दे दे कि जिन पात्र लोगों से शुल्क लिया गया है ।उनका पट्टा तत्काल वितरित होगा और अनावश्यक अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई रोकी जाएगी, तो आंदोलन उसी क्षण समाप्त कर दिया जाएगा।
सबसे अहम मुद्दा पट्टा वितरण का रहा। प्रतिनिधिमंडल ने दस्तावेजों के साथ तथ्य रखा कि पूर्व सरकार के समय पात्र हितग्राहियों से विधिवत शुल्क लिया गया, पट्टा तैयार हुआ, लेकिन वितरण रोक दिया गया। आज भी पट्टा एसडीएम कार्यालय में लंबित है। जिन लोगों ने भुगतान किया, वे वैध दस्तावेज की प्रतीक्षा में हैं। सवाल उठा—जब राशि ली जा चुकी है और प्रक्रिया पूर्ण है, तो वितरण में देरी क्यों?
मामला विधानसभा तक पहुंच चुका है। कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने सदन में विस्थापन और प्रभावित मकानों की संख्या को लेकर प्रश्न उठाया और प्रशासनिक आंकड़ों में अंतर की ओर ध्यान दिलाया।
बैठक में प्रधानमंत्री के उस वादे का उल्लेख किया गया जिसमें गरीबों को उनके निवास स्थल पर ही पक्का आवास देने की बात कही गई है। साथ ही प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया कि पात्र हितग्राहियों को उनका अधिकार मिलना चाहिए।
आंदोलन को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित विभिन्न संगठनों का समर्थन प्राप्त है।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी दोहराया कि मामला न्यायालय में लंबित है और हाई कोर्ट के जो भी निर्देश होंगे, उनका पालन होगा। लेकिन न्यायिक प्रक्रिया के बीच अनावश्यक विस्थापन स्वीकार्य नहीं होगा।
निगम कमिश्नर ने संबंधित बिंदुओं पर रिपोर्ट मंगाने और वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करने की बात कही, पर तत्काल लिखित आश्वासन नहीं दिया।
इस बीच आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो 100वें दिन मशाल रैली निकाली जाएगी। आंदोलन अब केवल धरना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनसमर्थन के साथ व्यापक रूप लेगा।
लिंगियाडीह का यह संघर्ष अब केवल अतिक्रमण का मुद्दा नहीं, बल्कि अधिकार, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल बन चुका है। अब निगाह इस बात पर है कि पट्टा वितरण होगा या 97 दिनों का यह आंदोलन और तेज रूप लेगा।





