कवर्धा पुलिस का तालिबानी खेल…सुप्रीम कोर्ट आदेश की खुलेआम अनदेखी…दुष्कर्म पीड़िता को ही बना दिया आरोपी

अधिवक्ता ने किया यौन शोषण
महिला का आरोप है कि अगस्त 2021 में एक दीवानी मामले में उसकी मुलाकात कवर्धा के एक अधिवक्ता से हुई। मई 2022 से अधिवक्ता ने उसे अश्लील संदेश भेजने शुरू कर दिए। मना करने के बावजूद यह हरकत जारी रही। मां की मृत्यु और खराब आर्थिक स्थिति के कारण वह अकेली थी, जिसका अधिवक्ता ने फायदा उठाया।
पीड़िता का आरोप है कि अधिवक्ता ने कार्यालय में रोककर जबरन छेड़छाड़ की। बाद में अपने घर बुलाकर कई बार दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उसने धमकियां और बदनाम करने की चेतावनी दी। जनवरी 2023 तक यह सिलसिला जारी रहा। महिला ने अप्रैल 2024 में पुलिस को दुष्कर्म की शिकायत सौंपी।
पांच महीने बाद उल्टा मामला दर्ज
चालान पेश करने की तैयारी
महिला के अनुसार पुलिस अब उसके खिलाफ चालान पेश करने की तैयारी में है, ताकि उसे गिरफ्तार किया जा सके। सवाल उठता है कि यदि महिला ने सचमुच अधिवक्ता को ब्लैकमेल किया होता, तो इतने लंबे समय तक उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।
कानूनी विशेषज्ञ की राय
बिलासपुर हाई कोर्ट की अधिवक्ता मीना शास्त्री ने कहा कि दुष्कर्म एक संज्ञेय अपराध है और इसमें पुलिस को तत्काल एफआईआर करनी होती है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘ललिता कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस को ऐसे मामलों में देरी करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती है, तो पीड़िता मजिस्ट्रेट या हाई कोर्ट में गुहार लगा सकती है।
राजनीतिक हलचल संभव
मामला राज्य के गृह मंत्री के गृह जिले से जुड़ा होने के कारण प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। महिला संगठनों और समाजसेवी संस्थाओं ने इसे “तालिबानी रवैया” बताते हुए राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।