युवाओं से वादा, बजट में इरादा गायब?’—कांग्रेस का संगठित हमला
‘संकल्प या संकल्पना?’ बजट पर कांग्रेस का तीखा प्रहार

बिलासपुर… राज्य सरकार के बजट 2026-27 को लेकर कांग्रेस नेताओं ने तीखी और क्रमबद्ध प्रतिक्रिया दी है। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इसे युवाओं, किसानों और मध्यम वर्ग की अपेक्षाओं से दूर बताया है।
विजय केशरवानी: “रोजगार पर मौन, ग्रीन बजट में जमीनी हकीकत गायब”
पूर्व जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी ने बजट को युवाओं के साथ धोखा बताया। उनका कहना है कि रोजगार और नौकरी सृजन पर कोई ठोस घोषणा नहीं दिखती, जिससे बेरोजगारी और बढ़ेगी। ग्रीन बजट के नाम पर बड़े प्रावधान का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि हसदेव अरण्य और तमनार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के संरक्षण की स्पष्ट योजना क्यों नहीं है। शिक्षा क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज न होना भी उन्होंने गंभीर कमी बताया।
सिद्धांशु मिश्रा: “संकल्प नहीं, दिशा विहीन दस्तावेज”
शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने बजट को प्रदेश को पीछे ले जाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग के लिए राहत के ठोस प्रावधान नजर नहीं आते। प्रदेश की जीडीपी वृद्धि और राजकोषीय घाटा कम करने के दावों पर उन्होंने कहा कि लक्ष्यों की घोषणा पर्याप्त नहीं, उनके लिए ठोस कार्ययोजना भी सामने आनी चाहिए। एयरपोर्ट अधोसंरचना के लिए घोषित राशि को भी उन्होंने अपर्याप्त बताया।
रविंद्र सिंह: “गांव-गरीब और कर्मचारी वर्ग की अनदेखी”
पूर्व अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने बजट को गांव, गरीब, मजदूर, महिला और कर्मचारियों के साथ अन्याय बताया।
उन्होंने कहा कि युवाओं और किसानों के लिए कोई नई पहल नहीं दिखती। महंगाई नियंत्रण, बेरोजगारी उन्मूलन और बंद स्कूलों को पुनः शुरू करने पर स्पष्ट प्रावधान नहीं है। जल-जंगल-जमीन और आदिवासी हितों की रक्षा के लिए भी ठोस रोडमैप का अभाव उन्होंने रेखांकित किया।
अरविंद शुक्ला: “दावे बड़े, संरचनात्मक बदलाव नदारद”
पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अरविंद शुक्ला ने बजट का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि दावों और जमीनी सच्चाई में अंतर स्पष्ट दिखता है। धान की अंतर राशि, बढ़ती कृषि लागत और सिंचाई विस्तार पर पर्याप्त प्रावधान नहीं दिखते। उन्होंने अंशकालिक और यह अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण, आंदोलनरत कर्मचारियों की मांगों तथा युवाओं और महिलाओं के लिए ठोस बजटीय पहल न होने की बात भी उठाई।
बजट को लेकर कांग्रेस की यह क्रमबद्ध प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तीखा कर सकती है। अब देखना यह होगा कि सरकार विपक्ष के इन आरोपों का क्या जवाब देती है और बजट के प्रावधानों का धरातल पर असर कितना दिखता है।





